Women Reservation Bill India: लोकसभा में महिला आरक्षण समेत तीन अहम विधेयक पेश होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए इन विधेयकों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।


कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार भारतीय लोकतंत्र को “हाईजैक” करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह कदम इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के समय स्थापित राज्य सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने जैसा है। वेणुगोपाल ने इन विधेयकों को असंवैधानिक करार दिया।


वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने महिला आरक्षण बिल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि “महिला बिल की चाशनी” में देश के साथ वैसा ही करने की कोशिश हो रही है जैसा कश्मीर और असम में हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पिछड़े वर्ग और मुस्लिम महिलाओं को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।


धर्मेंद्र यादव के बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण संभव नहीं है और ऐसी बातें असंवैधानिक हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश की महिलाओं की बात होनी चाहिए, न कि किसी एक वर्ग की।


इस मुद्दे पर सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी सरकार पर हमलावर नजर आए। उन्होंने कहा कि सरकार जनगणना से बच रही है क्योंकि जाति जनगणना होते ही आरक्षण की मांग और तेज हो जाएगी।


गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ बयान जनता में भ्रम पैदा करने वाले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार ने जाति जनगणना का निर्णय भी ले लिया है। शाह ने यह भी कहा कि फिलहाल मकानों की गिनती हो रही है, जाति की नहीं। अमित शाह ने धर्मेंद्र यादव के मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की मांग को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता।