UPSC Success Story: कहते हैं कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है आईपीएस अधिकारी प्रताप गोपेंद्र ने जिन्होंने सीमित संसाधनों, आर्थिक तंगी और तमाम चुनौतियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल किया। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में जगह बनाकर लाखों युवाओं के लिए वो प्रेरणा स्त्रोत बन गए हैं।
गाय-भैंस चराते हुए बीता बचपन
प्रताप गोपेंद्र का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में गुजरा। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े प्रताप का अधिकांश समय गाय-भैंस चराने में बीतता था। उनके पिता की एक छोटी सी डिस्पेंसरी थी, जिससे परिवार का गुजारा चलता था। आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के कारण पढ़ाई के लिए पर्याप्त सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं थीं।
अपने संघर्षों को याद करते हुए प्रताप गोपेंद्र ने बताया कि उन्होंने आठवीं कक्षा तक बोरी पर बैठकर पढ़ाई की। लेकिन सीमित संसाधनों के बावजूद उनके सपने बहुत बड़े थे, जिसे पाना किसी चुनौती से कम नहीं था। गांव से निकलकर कुछ बड़ा करने की चाह ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
करियर को लेकर थे असमंजस में
इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रताप गोपेंद्र यह तय नहीं कर पा रहे थे कि आगे किस क्षेत्र में करियर बनाना है। बेहतर अवसरों की तलाश में उन्होंने वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज में दाखिला लिया और वहां से बीएससी की डिग्री प्राप्त की।
ग्रेजुएशन के दौरान ही उनके मन में प्रशासनिक सेवा में जाने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी और यूपीपीसीएस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी करने का निर्णय लिया। हालांकि, यह राह आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने चुनौतियों से पीछे हटने के बजाय उनका सामना करने का फैसला किया।
कोचिंग फीस जुटाना भी था बड़ी चुनौती
साल 2005 में प्रताप गोपेंद्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए प्रयागराज पहुंचे। वहां उन्हें सबसे पहले वैकल्पिक विषय चुनने में कठिनाई हुई। आखिरकार दोस्तों की सलाह पर उन्होंने इतिहास और दर्शनशास्त्र विषय का चयन किया।आर्थिक तंगी इतनी थी कि इतिहास की कोचिंग की फीस भरना भी मुश्किल हो रहा था। कोचिंग की फीस 3000 रुपये थी, जिसे बाद में 2500 रुपये कर दिया गया। इसके बावजूद प्रताप एकमुश्त फीस जमा नहीं कर पाए और उन्हें पांच किस्तों में भुगतान करना पड़ा। लेकिन उन्होंने आर्थिक परेशानियों को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया।
असफलताओं से नहीं मानी हार
यूपीएससी की तैयारी के दौरान प्रताप गोपेंद्र को कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा। वर्ष 2008 में उन्होंने पहली बार यूपीएससी की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पास कर ली, लेकिन इंटरव्यू में सफलता नहीं मिल सकी। अंतिम चरण में मिली इस असफलता ने उनके सपनों को झटका जरूर दिया, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा। उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और लगातार मेहनत करते रहे। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और वर्ष 2012 बैच में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए हो गया।
आज DIG के पद पर दे रहे हैं सेवाएं
आईपीएस बनने के बाद प्रताप गोपेंद्र ने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। वर्तमान में वे पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) के पद पर कार्यरत हैं। प्रताप गोपेंद्र की सफलता की कहानी यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो संसाधनों की कमी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। उनका जीवन संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प का ऐसा उदाहरण है, जो लाखों युवाओं को अपने सपनों के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की प्रेरणा देता है।