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मौका देखकर बदलने वाले को क्या कहते हैं? पंडित..मच गया बवाल

उत्तर प्रदेश में दारोगा भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न में ‘अवसर के अनुसार बदलने वाला’ के विकल्प में पंडित शब्द शामिल होने पर विवाद खड़ा हो गया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और जांच के आदेश दिए।

14-Mar-2026 09:49 PM

By First Bihar

DESK: वेब सीरीज 'घूसखोर पंडत' का शीर्षक को लेकर अभी विवाद थमा भी नहीं था कि एक और मामला सामने आ गया है। दरअसल उत्तर प्रदेश में दारोगा भर्ती के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गयी थी। जिसमें एक वैकल्पिक प्रश्न ऐसा पूछा गया कि जिसके पहले विकल्प को लेकर बवाल मचा हुआ है। यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने खुद इस प्रश्न के विकल्प में पंडित शब्द के प्रयोग पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। कहा कि सख्त कार्रवाई की जाएगी।


बता दें कि सोशल मीडिया पर दारोगा भर्ती परीक्षा का सामान्या हिन्दी सेक्शन वन का प्रश्न पत्र वायरल हो रहा है। जिसमें एक प्रश्न पूछा गया है कि मौका देखकर बदलने वाले को क्या कहते हैं? मुहावरे के उत्तर में दिए गए 4 विकल्पों में पहला विकल्प पंडित लिखे जाने का मामला सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। जिसे लेकर लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। इस सवाल के विकल्प को लेकर बवाल मचा हुआ है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पुलिस भर्ती परीक्षा में पूछे गए प्रश्न के विकल्प में पंडित शब्द के प्रयोग पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सख्त कार्रवाई की बात कही।


 दरअसल, इस प्रश्न में पूछा गया है कि ‘अवसर के अनुसार बदलने वाला’ इस वाक्यांश के लिए एक शब्द का चयन कीजिए. इसमें चार विकल्पों में पहला है सदाचारी, दूसरा पंडित, तीसरा अवसरवादी और चौथा निष्कपट। पंडित विकल्प दिए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पुलिस भर्ती परीक्षा में पूछे गए प्रश्न के विकल्प में पंडित शब्द के प्रयोग पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर किए पोस्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में आए एक प्रश्न को लेकर जो विकल्प दिए गए उन पर हमे कड़ी आपत्ति है। सरकार ने गंभीरता से संज्ञान में लिया है। किसी भी प्रश्न से किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचती है तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।


उत्तर प्रदेश में दारोगा भर्ती परीक्षा के एक सवाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडित’ के शीर्षक पर चल रहे विवाद के बीच अब भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में ‘पंडित’ शब्द को एक विकल्प के रूप में शामिल किए जाने पर नया बवाल शुरू हो गया है। दरअसल, सोशल मीडिया पर दारोगा भर्ती परीक्षा के सामान्य हिंदी सेक्शन का एक प्रश्नपत्र वायरल हो रहा है। इसमें एक प्रश्न पूछा गया था— “अवसर के अनुसार बदलने वाले को क्या कहते हैं?” इसके लिए चार विकल्प दिए गए थे: सदाचारी, पंडित, अवसरवादी और निष्कपट। इन्हीं विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द शामिल किए जाने पर लोगों ने आपत्ति जताई है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और कई लोग इसे एक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बता रहे हैं।


इस मामले पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पुलिस भर्ती परीक्षा में पूछे गए इस प्रश्न के विकल्प पर सरकार ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। अगर किसी प्रश्न से किसी समाज या वर्ग की गरिमा को ठेस पहुंचती है, तो यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी जाति, समुदाय या परंपरा के प्रति अपमानजनक शब्दों को कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। साथ ही पूरे मामले की तत्काल जांच के निर्देश दिए गए हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही गई है।


इधर, भाजपा प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा ने भी इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि प्रश्न को गलत तरीके से फ्रेम किया गया है। सही अर्थ में ‘अवसर के अनुसार बदलने वाला’ का उत्तर ‘अवसरवादी’ होता है, लेकिन विकल्पों में ‘पंडित’ को शामिल करना एक विशेष समुदाय की भावनाओं को आहत करता है। अभिजात मिश्रा ने कहा कि ‘पंडित’ शब्द का संबंध विद्वान, ज्ञानी और धार्मिक सम्मान से होता है। इसे अवसरवादी जैसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना अनुचित और असंवेदनशील है। वहीं, अखिल भारत हिंदू महासभा ने भी इस मामले में दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।


फिलहाल, भर्ती बोर्ड के अधिकारी इस विवाद पर खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड अपनी परीक्षा के प्रश्नपत्र बाहरी एजेंसी के माध्यम से तैयार करवाता है। एजेंसी को निर्धारित सिलेबस के आधार पर हजारों प्रश्न दिए जाते हैं और कंप्यूटर के जरिए रेंडमाइज प्रक्रिया के तहत प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं। एजेंसी के चयन और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को गोपनीय रखा जाता है। अब इस पूरे मामले की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि प्रश्नपत्र में यह विकल्प किस स्तर पर शामिल किया गया।