DESK: इस वक्त की बड़ी खबर तिब्बत से आ रही हैं, जहां गुरुवार की देर शाम भूकंप के तेज झटकें महसूस किये गये। तिब्बत में अचानक धरती कांप उठी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 7.0 मापी गई। रात 8 बजकर 3 मिनट पर आए इस भूकंप के झटके दूर तक महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 173 किलोमीटर की गहराई में था। फिलहाल, किसी बड़े नुकसान की तत्काल खबर नहीं है।
तिब्बत में आए इस शक्तिशाली भूकंप ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले 8 सितंबर को नेपाल में भी भूकंप दर्ज किया गया था।
यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को हुए भीषण हिम-चट्टान स्खलन और बाढ़ के बाद राहत कार्य जारी होने की खबरें सामने आई थीं। उस आपदा में घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा था। कई लोगों के लापता होने और जनहानि की खबरें भी सामने आई थीं।
विशेषज्ञों और चीनी शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण किंघई-तिब्बत पठार के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इससे भविष्य में हिमनद झीलों से बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है।
किंघई-तिब्बत पठार ब्रह्मपुत्र समेत कई प्रमुख नदियों का उद्गम क्षेत्र है। यहां होने वाले पर्यावरणीय बदलावों का असर उन नदियों के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में इस संवेदनशील क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों और ग्लेशियरों में हो रहे बदलावों पर नजर रखना बेहद जरूरी है।