नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ आधिकारिक कार्यक्रमों, यात्राओं और महत्वपूर्ण मौकों पर अक्सर नजर आने वाले 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज के अधिकारी ऋषभ सिंह सांब्याल ने भारतीय सेना से समय से पहले रिटायरमेंट ले लिया है। राष्ट्रपति के एडीसी (Aide-de-Camp) के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के दौरान वह पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए थे। राष्ट्रपति के साथ उनकी मौजूदगी, सतर्कता और संवेदनशील व्यवहार की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर अक्सर वायरल होते रहे। अब उनके सेना छोड़ने की खबर ने एक बार फिर लोगों का ध्यान उनकी ओर खींचा है।
राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति से की मुलाकात
औपचारिक रूप से अपना पद छोड़ने के बाद ऋषभ सिंह सांब्याल ने 21 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक डिजिटल फोटो लाइब्रेरी में भी उन्हें 'रिटायर्ड पूर्व एडीसी' के रूप में दिखाया गया। बाद में शेयर किए गए पोस्ट और वीडियो में उन्होंने राष्ट्रपति से हुई इस मुलाकात को उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद के लिए आभार व्यक्त करने का अवसर बताया।
2021 में पहली बार आए थे चर्चा में
ऋषभ सिंह सांब्याल पहली बार 2021 में बड़े स्तर पर चर्चा में आए थे। उस समय वह जाट रेजिमेंट में कैप्टन थे और गणतंत्र दिवस परेड में रेजिमेंट की टुकड़ी का नेतृत्व किया था। उनके नेतृत्व में टुकड़ी ने बेस्ट मार्चिंग कंटिंजेंट ट्रॉफी जीती थी। इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना की बेहद कठिन मानी जाने वाली 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज में शामिल होने के लिए स्वेच्छा से चयन प्रक्रिया पूरी की। उन्होंने कठिन ट्रेनिंग और चयन प्रक्रिया के बाद बलिदान बैज हासिल किया। यह सम्मान और पहचान विशेष बलों के बेहद कम अधिकारियों और जवानों को मिलती है।
कौन हैं मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल?
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल जम्मू के एक डोगरा राजपूत परिवार से आते हैं, जिसका सैन्य परंपरा से पुराना जुड़ाव रहा है। उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी में तीन साल की ट्रेनिंग ली और इसके बाद इंडियन मिलिट्री एकेडमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया।ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त अधिकारी के रूप में सेवा शुरू की। सेना के साथ उनका कुल जुड़ाव लगभग 12 वर्षों का रहा, जिसमें करीब आठ साल उन्होंने कमीशन प्राप्त अधिकारी के तौर पर सेवा दी।बाद में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के एडीसी के रूप में चुना गया। यह जिम्मेदारी सशस्त्र बलों की सबसे प्रतिष्ठित और संवेदनशील जिम्मेदारियों में से एक मानी जाती है।
राष्ट्रपति के साथ दिखी अलग बॉन्डिंग
एडीसी के रूप में ऋषभ सिंह सांब्याल की जिम्मेदारी केवल राष्ट्रपति के साथ कार्यक्रमों में मौजूद रहना नहीं थी। उन्हें प्रोटोकॉल, आधिकारिक कार्यक्रमों, यात्राओं और विभिन्न संवेदनशील व्यवस्थाओं में समन्वय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभानी होती थीं।
लेकिन आम लोगों के बीच उनकी पहचान राष्ट्रपति के साथ दिखाई देने वाले उनके व्यवहार और सतर्कता से बनी। कभी बारिश में राष्ट्रपति के ऊपर छाता पकड़े हुए, कभी किसी भावुक मौके पर रुमाल देते हुए तो कभी मंदिर की सीढ़ियों पर उनकी सहायता करते हुए उनके वीडियो वायरल हुए।
सरकारी और औपचारिक कार्यक्रमों में भी उनका शांत और बेहद अनुशासित व्यवहार लोगों को प्रभावित करता रहा। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उन्हें मजाकिया अंदाज में 'नेशनल क्रश' तक कहना शुरू कर दिया था। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निजी सोशल मीडिया मौजूदगी सीमित रखने के बावजूद उनके नाम से कई फैन पेज बन गए।
समय से पहले रिटायरमेंट क्यों लिया?
सेना छोड़ने के बाद जारी किए गए वीडियो और इंस्टाग्राम लाइव में ऋषभ सिंह सांब्याल ने अपने फैसले को लेकर लोगों के सवालों का जवाब दिया।उन्होंने बताया कि वर्दी पहनना उनके बचपन का सपना था और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह इसे उतारने का फैसला करेंगे। उन्होंने कहा कि जिंदगी में कुछ ऐसे हालात और पल आते हैं, जो व्यक्ति के जीवन की दिशा को बदल देते हैं।उन्होंने अपने फैसले के पीछे निजी और पारिवारिक कारण बताए। साथ ही कहा कि इस निर्णय में उन्हें अपने परिवार का पूरा समर्थन मिला है। सांब्याल ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने जीवन में जो कुछ हासिल किया है, उससे वह खुश और संतुष्ट हैं। शादी को लेकर उन्होंने फिलहाल किसी तत्काल योजना से इनकार किया है।
आगे क्या करेंगे?
रिटायरमेंट के बाद उनके अगले कदम को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि उन्होंने अभी अपने भविष्य की किसी विस्तृत योजना का खुलासा नहीं किया है। उन्होंने इतना जरूर कहा है कि वह आगे भी देश के लिए योगदान देते रहेंगे और सही समय आने पर अपने अगले कदम की जानकारी साझा करेंगे।
उनके एडीसी कार्यकाल के दौरान यह अटकलें भी लगाई जाती रही थीं कि वह राष्ट्रपति भवन की जिम्मेदारी पूरी करने के बाद फिर से स्पेशल फोर्सेज की ऑपरेशनल भूमिका में लौट सकते हैं। लेकिन उन्होंने सेना में वापसी के बजाय समय से पहले पूरी तरह सेवा से अलग होने का फैसला किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ उनकी भूमिका अब भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन उनके कार्यकाल की तस्वीरें और वीडियो लंबे समय तक लोगों को याद रहेंगे। अनुशासन, सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ-साथ राष्ट्रपति के प्रति उनके सम्मान और भरोसे ने उन्हें देशभर में एक अलग पहचान दिलाई।