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कर्ज से पढ़ाई, कर्ज से इलाज और कर्ज से ही एयर एंबुलेंस… रांची प्लेन क्रैश ने एक साथ उजाड़े कई परिवार

रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस टेकऑफ के 23 मिनट बाद चतरा में क्रैश हो गई। मरीज के इलाज और डॉक्टर की पढ़ाई तक सब कर्ज के सहारे था, लेकिन इस हादसे ने एक साथ कई परिवारों के सपने और सहारे छीन लिए।

बिहार न्यूज

24-Feb-2026 03:06 PM

By First Bihar

DESK: सोमवार की देर शाम रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस हादसे का शिकार हो गयी। रांची से टेकऑफ के 23 मिनट बाद एयर एम्बुलेंस  क्रैश हो गया। खराब मौसम के कारण उसमें सवार 7 लोगों की दर्दनाक मौत हो गयी। जिसमें मरीज, डॉक्टर, दो पायलट और परिजन शामिल थे। इस घटना ने एक ही पल में सबकुछ तबाह कर दिया। सूद पर और उधार पैसे लेकर किसी तरह 8 लाख रुपये का इंतजाम बड़ी मुश्किल से किया गया था। इस उम्मीद से कि इलाज के लिए दिल्ली ले जाने पर शायद मरीज ठीक हो जाएगा। 


लातेहार के चंदवा निवासी संजय कुमार को वहां के डॉक्टरों ने दिल्ली रेफर कर दिया था। उन्हें परिजन बड़ी मुश्किल से एयर एम्बुलेंस बुक कर दिल्ली ले जा रहे थे, लेकिन विमान के टेकऑफ के 23 मिनट बाद ही इतना बड़ा हादसा हो गया। जिसमें मरीज सहित 7 लोगों की मौत हो गयी। बताया जाता है कि संजय पलामू के बकोरिया में ढाबा चलाते थे। बीते कुछ दिन पहले उनके ढाबे में आग लग गयी थी, जिसमें वो बुरी तरह झुलस गये थे। रांची के देवकमल अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया गया था। लेकिन सोमवार को उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गयी।


 हालत नाजुक होता देख वहां के डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया। परिवार को उम्मीद थी कि दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में बेहतर इलाज से उनकी जान बचाई जा सकेगी। मरीज की जान बचाने के लिए परिवार ने हर संभव कोशिश की। जमीन बेचने का फैसला लिया लेकिन तुरंत पैसे की व्यवस्था संभव नहीं थी। ऐसे में दोस्तों, रिश्तेदारों और परिचितों से पैसा उधार लिया। यहां तक कि ब्याज पर पैसा लेकर करीब आठ लाख रुपये इकट्ठा किया गया। इसी राशि से रेड बर्ड एविएशन की एयर एंबुलेंस की बुकिंग कराई गयी। 


सोमवार शाम करीब 7:10 बजे रांची से दिल्ली के लिए एयर एंबुलेंस ने उड़ान भरी। विमान में मरीज संजय कुमार, उनकी पत्नी, दो पायलट, एक डॉक्टर समेत कुल सात लोग सवार थे। उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद, लगभग 7:34 बजे एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया। बाद में सूचना मिली कि विमान चतरा जिले के सिमरिया क्षेत्र के करमटांड़ जंगल में क्रैश हो गया है। चतरा के पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल के अनुसार, विमान जंगल में गिरा और मौके पर ही सभी सात लोगों की मौत हो गई। यह खबर सुनते ही प्रशासन और बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस घटना से मृतकों के परिजनों के बीच कोहराम मचा हुआ है।


मृतक संजय अपने पीछे दो मासूम बच्चे 13 वर्षीय शिवम और 17 वर्षीय शुभम को छोड़ गए, जो अब माता-पिता के साये से वंचित हो गए हैं। परिवार पहले भी दुख झेल चुका था। 2004 में नक्सलियों ने उनके पिता की हत्या कर दी थी। भय के माहौल में परिवार पहले ही गांव छोड़कर चंदवा आ बसा था और नई जिंदगी शुरू की थी। संजय पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। बड़े भाई विजय साव भी ढाबा चलाते हैं। एक भाई की पहले ही इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। परिवार की मां चिंता देवी बेटे संजय की असमय मौत से गहरे सदमें में हैं। हादसे में संजय की पत्नी अर्चना और 17 वर्षीय ध्रुव कुमार की भी जान चली गई।


सिमडेगा निवासी ध्रुव रांची में रहकर पढ़ाई कर रहा था। मोबाइल इंजीनियरिंग में करियर बनाने का सपना देख रहा था। इसके लिए वह दिल्ली जाने की तैयारी कर रहा था। ध्रुव घर का इकलौता चिराग था। संजय उनसे मामा थे। जब मामा संजय ढाबे में लगी आग में झुलसे थे तब ध्रुव ने दिल्ली की तैयारी रोक दी और उनकी सेवा में लग गया। डॉक्टरों ने दिल्ली रेफर किया तो वह भी साथ दिल्ली चल पड़ा। वही उसकी मामी अर्चना ने जिस उम्मीद के साथ कर्ज लेकर एयर एंबुलेंस का इंतजाम किया गया था, वही उम्मीद आसमान में ही टूट गई। यह हादसा सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि कई घरों के सपनों को हमेशा के लिए खत्म कर गया।


वही इस हादसे में एयर एम्बुलेंस पर मरीज संजय के साथ मौजूद डॉक्टर विकास गुप्ता की भी मौत हो गयी। डॉ विकास गुप्ता रांची के सदर अस्पताल में तैनात थे। बिहार के औरंगाबाद जिला निवासी बजरंगी प्रसाद अपने बेटे डॉक्टर विकास गुप्ता की इस दर्दनाक मौत से काफी सदमें में हैं। टूटी आवाज में उन्होंने कहा कि बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए हमने अपनी सारी जमीन बेच दी थी। डॉ. विकास गुप्ता ने ओडिशा के कटक से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। लोग कहते थे कि बेटा को डॉकटर बनाने के लिए इतना कर्ज मत लो, इतना पैसा तुम चुकाओगे कैस? लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं सुनी जवाब में यह कहा कि जब बेटा पढ़ लिखकर डॉक्टर बन जाएगा तब वह खुद सब कर्ज चुका देगा। एयर एंबुलेंस के क्रैश होने की घटना में एक साथ सात लोगों की मौत ने हरेक परिवार को झकझोर कर रख दिया है। परिजन काफी सदमें में हैं। उनके आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।