DESK:सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स होना चुनाव में जीत की गारंटी नहीं है।  सोशल मीडिया पर 21 लाख से अधिक फॉलोअर्स रखने वाले इन्फ्लुएंसर ओम प्रकाश बिश्नोई को सरपंच पद के चुनाव में महज 33 वोट मिले हैं।


राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 के पहले चरण के नतीजों में यह बात एक बार फिर चर्चा में आ गई है। जोधपुर जिले की ओसियां तहसील की इंदों की ढाणी ग्राम पंचायत से चुनाव लड़ रहे ओम प्रकाश बिश्नोई को उम्मीद थी कि सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता का फायदा चुनाव में भी मिलेगा। हालांकि, मतगणना के बाद सामने आए नतीजों में उन्हें बेहद कम वोट मिले।


नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता को बनाया था मुद्दा

ओम प्रकाश बिश्नोई इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। इन सभी प्लेटफॉर्म को मिलाकर उनके 21 लाख से अधिक फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं। अपने चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी थी।


इंटरनेट पर उनके वीडियो को बड़ी संख्या में व्यूज और लाइक्स मिलते हैं। ऐसे में उनकी डिजिटल लोकप्रियता को लेकर चुनावी नतीजों पर लोगों की नजर थी। लेकिन चुनाव में उन्हें केवल 33 वोट मिलने की जानकारी सामने आई है।


सोशल मीडिया की लोकप्रियता और चुनावी राजनीति में अंतर

इस नतीजे ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और जमीनी राजनीति के बीच के अंतर को चर्चा में ला दिया है। सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को पसंद करने वाले सभी लोग जरूरी नहीं कि उसे चुनाव में वोट भी दें।


पंचायत चुनावों में स्थानीय मुद्दे, मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क, गांव के सामाजिक समीकरण और उम्मीदवार के प्रति भरोसा अहम भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, ओम प्रकाश बिश्नोई को इतने कम वोट मिलने के पीछे की सटीक वजह स्पष्ट नहीं है। राजस्थान पंचायत चुनाव के पहले चरण में आए नतीजे यह संदेश देते हैं कि डिजिटल लोकप्रियता अपने आप में चुनावी जीत की गारंटी नहीं है।