MUMBAI:महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि मंदिर में हर साल करीब 18 करोड़ रुपये के दान का गबन किया जा रहा है। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सर्वंकर ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
पार्टी कार्यक्रम में उठाया मुद्दा
राज ठाकरे ने 01 अगस्त (शनिवार) को मुंबई में अपनी पार्टी की छात्र इकाई की 20वीं वर्षगांठ कार्यक्रम में यह मुद्दा उठाया। मनसे प्रमुख राज ठाकरे कहा कि आज के समय में मंदिर में भी भ्रष्टाचार का बोल बाला है, मंदिर भी अब अछूता नहीं रह गया है। राज ठाकरे ने कहा कि बड़ी संख्या में युवा श्रद्धालु मंदिरों में आस्था के साथ जाते हैं, लेकिन वहां भी कथित अनियमितताओं की खबरें सामने आ रही हैं।
राम मंदिर और अन्य मंदिरों का भी किया जिक्र
राज ठाकरे ने अयोध्या के राम मंदिर और उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों पर सरकार और संबंधित पक्षों की ओर से पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
ट्रस्टियों के पत्र का किया हवाला
राज ठाकरे ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के आठ ट्रस्टियों ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पत्र में उल्लेख है कि दान पेटी से धन की कथित हेराफेरी में कुछ कर्मचारी शामिल थे और ट्रस्टियों की सतर्कता के कारण उन्हें पकड़ा गया।
उन्होंने दावा किया कि कर्मचारियों के पकड़े जाने के बाद मंदिर में दान की औसत राशि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे यह संकेत मिलता है कि पहले बड़े पैमाने पर गबन हो रहा था। उनके अनुसार, पत्र में प्रति वर्ष लगभग 18 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का उल्लेख है।
ट्रस्ट अध्यक्ष ने आरोपों को बताया भ्रामक
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सर्वंकर ने राज ठाकरे के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उनके बयान में तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 18 करोड़ रुपये के घोटाले की कोई आधिकारिक शिकायत नहीं है।
सर्वंकर ने कहा कि कुछ कर्मचारियों द्वारा दान राशि के दुरुपयोग की जानकारी मिलने पर ट्रस्ट ने कार्रवाई करते हुए 9 कर्मचारियों के खिलाफ कदम उठाए। उन्होंने बताया कि जिन कर्मचारियों पर श्रद्धालुओं से जल्दी दर्शन कराने के लिए पैसे लेने या अन्य अनियमितताओं के आरोप थे, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की गई।
दान में वृद्धि का दावा
ट्रस्ट अध्यक्ष के अनुसार, प्रबंधन में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने के उपायों के कारण मंदिर की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि दो वर्ष पहले मंदिर को लगभग 114 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ था, जो अब बढ़कर 182 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।