Prahlad Joshi: कॉकरोच जनता पार्टी और छात्रों के 36 दिनों के आंदोलन के बाद शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई। उन्होंने रविवार को औपचारिक रूप से शिक्षा मंत्री का पद संभाल लिया।
पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एक संक्षिप्त बैठक भी की। प्रह्लाद जोशी के पास शिक्षा मंत्रालय के साथ-साथ उनके पहले से संभाले जा रहे मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी बनी रहेगी। फिलहाल उनके पास नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का प्रभार भी है।
बीजेपी में प्रह्लाद जोशी को एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता के रूप में जाना जाता है। संसद की कार्यवाही के दौरान भी वह लगातार सक्रिय रहे हैं। वह लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे हैं, जिसके कारण संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
प्रह्लाद जोशी ने अपनी राजनीतिक यात्रा कर्नाटक के धारवाड़ जिले से शुरू की थी। उन्होंने यहां पार्टी के लिए लंबे समय तक काम किया और वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में पहली बार धारवाड़ से जीत हासिल कर संसद पहुंचे।
इसके बाद उन्होंने लगातार पांच लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की। पिछले 22 वर्षों से लोकसभा सांसद रहे प्रह्लाद जोशी को कर्नाटक के लोकप्रिय और प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। पांच बार चुनाव जीतने के कारण राज्य की राजनीति में उनका खासा प्रभाव माना जाता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी ने शिक्षा मंत्रालय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को काफी सोच-समझकर सौंपी है। वह वर्ष 2012 में कर्नाटक बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 2014 के बाद उन्हें लोकसभा की कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों की जिम्मेदारी दी गई।
वर्ष 2019 में उन्होंने संसदीय कार्य मंत्रालय के साथ-साथ कोयला और खनन मंत्रालय का कार्यभार संभाला। वहीं, तीसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई।
इतने बड़े छात्र आंदोलन के बाद नए शिक्षा मंत्री के सामने चुनौतियां काफी बड़ी हैं। छात्रों की उम्मीदें भी उनसे काफी अधिक हैं। प्रह्लाद जोशी के सामने नई शिक्षा नीति को प्रभावी तरीके से लागू करना, आगामी परीक्षाओं को सुचारू रूप से आयोजित कराना, सीबीएसई और एनसीईआरटी में जरूरी बदलाव करना जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। इसके अलावा उन्हें परीक्षा प्रणाली में मौजूद उन कमियों को भी दूर करना होगा, जिनकी वजह से पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना बनती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, NEET-UG परीक्षा के प्रारूप में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि अगले साल से यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित हो सकती है। इसके अलावा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के ढांचे में भी बदलाव किए जाने की चर्चा है।
यह भी विचार किया जा रहा है कि परीक्षा को दो चरणों में आयोजित कराया जाए, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावनाओं को कम किया जा सके। अब सभी की नजरें प्रह्लाद जोशी के कार्यकाल पर हैं, क्योंकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा सुधार और छात्रों का विश्वास बहाल करना उनके सामने सबसे बड़ी प्राथमिकताएं होंगी।