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'स्कूल-कॉलेज और दफ्तरों के लिए तय किए 5 नियम; 4 दिन का होगा सप्ताह ...!', तेल संकट के बाद PM ने लिया बड़ा फैसला; जानिए क्या -क्या बदल गया

मिडिल ईस्ट तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट का असर पाकिस्तान पर दिखने लगा है। तेल की कीमतें 100 डॉलर पार होते ही फ्यूल संकट गहराया। सरकार ने स्कूल दो हफ्ते बंद करने और सरकारी दफ्तर चार दिन चलाने का फैसला लिया।

10-Mar-2026 11:16 AM

By First Bihar

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ती अस्थिरता का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचते ही पाकिस्तान में ईंधन संकट गहराने लगा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट पर पाबंदियों और जहाजों की आवाजाही में बाधा के कारण पाकिस्तान को तेल की नियमित सप्लाई नहीं मिल पा रही है।


इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान की केंद्र सरकार ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कई सख्त फैसले लिए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के उद्देश्य से स्कूल-कॉलेज, सरकारी दफ्तरों और अन्य गतिविधियों को लेकर कई बड़े निर्देश जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक इन नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।


सरकार के नए निर्देशों के तहत पूरे पाकिस्तान में स्कूलों को दो हफ्तों के लिए बंद करने का फैसला लिया गया है। इसका मकसद छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की रोजाना आवाजाही को कम करना है, जिससे ईंधन की खपत कम हो सके। इसके साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों यानी कॉलेज और विश्वविद्यालयों की कक्षाओं को फिलहाल ऑनलाइन मोड में चलाने का निर्णय लिया गया है। इससे लाखों छात्रों और शिक्षकों के आवागमन में कमी आएगी और ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल की बचत होगी।


सरकार ने सरकारी कार्यालयों को लेकर भी बड़ा फैसला किया है। नए नियमों के अनुसार बैंकों को छोड़कर बाकी सभी सरकारी दफ्तर अब हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही खुलेंगे। इससे सरकारी कर्मचारियों की आवाजाही कम होगी और पेट्रोल-डीजल की खपत घटेगी। इसके साथ ही सरकार ने सरकारी विभागों में काम करने वाले 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था अस्थायी है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए जरूरी कदम माना जा रहा है।


ऊर्जा बचत के लिए सरकार ने सरकारी विभागों को मिलने वाले फ्यूल में भी बड़ी कटौती करने का फैसला किया है। अगले दो महीनों तक सरकारी विभागों को मिलने वाले पेट्रोल-डीजल में 50 प्रतिशत तक कमी कर दी जाएगी। इसका उद्देश्य सरकारी वाहनों के उपयोग को सीमित करना और ईंधन की बचत करना है। सरकार का मानना है कि इससे देश में उपलब्ध ईंधन को ज्यादा समय तक इस्तेमाल किया जा सकेगा।


इसके अलावा सरकार ने फिजूलखर्ची और अतिरिक्त ऊर्जा खपत को रोकने के लिए इफ्तार पार्टियों पर भी रोक लगा दी है। प्रशासन का कहना है कि बड़े आयोजनों और समारोहों में बड़ी मात्रा में बिजली और ईंधन की खपत होती है, इसलिए फिलहाल इस तरह के कार्यक्रमों को सीमित किया जा रहा है।


विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट और महंगाई की मार झेल रहा है। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव जारी रहता है, तो देश में ऊर्जा संकट और भी गंभीर हो सकता है।


सरकार ने फिलहाल लोगों से अपील की है कि वे ईंधन और बिजली का सोच-समझकर इस्तेमाल करें और संकट की इस घड़ी में सहयोग करें। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में हालात के मुताबिक और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।