DESK: ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लईकेरा थाना क्षेत्र के करमापाड़ा गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। धरमसिंह खड़िया नाम के एक व्यक्ति ने दावा किया कि खेत की ओर जाते समय उसका पैर एक कोबरा सांप पर पड़ गया, जिसके बाद उसने सांप को पकड़कर दांतों से काट लिया। इस घटना के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया।
धरमसिंह खड़िया के अनुसार, वह अपने खेत की ओर जा रहा था, तभी गलती से उसका पैर कोबरा पर पड़ गया। सांप को फन फैलाए देखकर वह घबरा गया। उसने बताया कि एक तांत्रिक ने उसे पहले कहा था कि यदि कभी सांप सामने आ जाए या काटने की कोशिश करे, तो उसे पकड़कर वापस काट लेने से जहर असर नहीं करता। इसी अंधविश्वास के चलते उसने यह कदम उठाया।
घटना के बाद युवक की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिजन उसे कुचिंडा उप-मंडलीय अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसकी जांच के बाद हालत स्थिर बताई और एहतियात के तौर पर 24 घंटे निगरानी में रखा।
उप-मंडलीय अस्पताल, कुचिंडा के डॉ. सत्यप्रकाश डोरा ने कहा कि युवक ने बेहद खतरनाक काम किया। उन्होंने बताया कि सांप का जहर तब जानलेवा होता है जब वह काटकर जहर शरीर में इंजेक्ट करता है। केवल सांप का मांस चबाने से जहर शरीर में उसी प्रकार नहीं फैलता, लेकिन ऐसा करना अत्यंत जोखिम भरा है।
स्नेक हेल्पलाइन से जुड़े शुभेंदु मलिक ने इस घटना को अंधविश्वास का गंभीर उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि लोगों को इस तरह की गलत सलाह देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि इससे लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।
विशेषज्ञों ने सर्पदंश की स्थिति में कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की सलाह दी है।
सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें।
झाड़-फूंक या तांत्रिकों के चक्कर में समय बर्बाद न करें।
पीड़ित को शांत रखें और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं।
समय पर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) उपचार उपलब्ध कराना सबसे प्रभावी उपाय है।
चिकित्सकों का कहना है कि सांप को वापस काटने से जहर बेअसर होने की धारणा पूरी तरह से मिथक है और ऐसा करना जानलेवा साबित हो सकता है।