भारत-नेपाल सीमा से जुड़े लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने सीमा पार से लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के दैनिक उपयोग के सामान पर लगाए गए कस्टम शुल्क यानी भंसार वसूली पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले के बाद सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों ने राहत की सांस ली है।
नेपाल और भारत के बीच वर्षों पुराना बेटी-रोटी का रिश्ता रहा है। दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए एक-दूसरे के यहां आते-जाते रहते हैं। ऐसे में नेपाल सरकार के हालिया फैसले ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। सरकार ने 2 मई 2082 को जारी अधिसूचना में कहा था कि भारत से नेपाल लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम शुल्क देना होगा। इस नियम के लागू होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी।
लोगों का कहना था कि सीमा के दोनों ओर बसे परिवारों का जीवन एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। कई परिवारों के रिश्तेदार भारत में रहते हैं तो कई नेपाल में। रोजमर्रा के सामान, दवाइयां और घरेलू जरूरत की चीजें सीमा पार से लाना आम बात है। ऐसे में हर सामान पर शुल्क लगाने से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था।
नेपाल सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए अधिवक्ता अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोग सिंह और प्रशांत विक्रम शाह ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से कहा कि यह नियम सीमा शुल्क अधिनियम 2081 की भावना के खिलाफ है और इससे आम लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने सरकार को अंतरिम आदेश जारी किया। अदालत ने प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय, वित्त मंत्रालय और संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि अंतिम फैसला आने तक दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर किसी प्रकार का कस्टम शुल्क नहीं लिया जाए।
अदालत के इस आदेश के बाद नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में खुशी का माहौल देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि न्यायालय ने आम जनता की परेशानी को समझते हुए सही फैसला लिया है। कई सामाजिक संगठनों और व्यापारियों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का मानना है कि भारत और नेपाल के संबंध सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच पारिवारिक और सांस्कृतिक जुड़ाव भी बेहद गहरा है। ऐसे में सख्त नियमों से सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ता है।
फैसले के बाद नेपाल के कई प्रमुख समाचार माध्यमों ने इसे प्रकाशित किया। सोशल मीडिया पर भी लोग न्यायालय की सराहना करते नजर आए। कई लोगों ने कहा कि जहां न्यायपालिका मजबूत और निष्पक्ष होती है, वहां सरकारें आम जनता के हितों को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय तक भारत-नेपाल सीमा से लाए जाने वाले दैनिक उपयोग के सामान पर अतिरिक्त भंसार शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे खासकर सीमावर्ती जिलों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है।