NEET Scam Bihar : बिहार में NEET-UG पुनर्परीक्षा फर्जीवाड़े की जांच अब एक बड़े सॉल्वर नेटवर्क की ओर बढ़ती नजर आ रही है। लखीसराय से शुरू हुई जांच के बाद आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को कई अहम सुराग मिले हैं। जांच एजेंसी को आशंका है कि यह मामला केवल एक परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार बिहार के कई जिलों और दूसरे राज्यों तक जुड़े हो सकते हैं।
21 जून को आयोजित NEET-UG पुनर्परीक्षा के दौरान सामने आए इस मामले में अब तक कई संदिग्धों की भूमिका जांच के दायरे में है। ईओयू ने इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने के लिए गिरफ्तार आरोपितों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), डिजिटल चैट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है।
लखीसराय से खुला फर्जीवाड़े का राज
जांच में सामने आया है कि लखीसराय परीक्षा केंद्र से जुड़े मामले के पीछे एक संगठित गिरोह काम कर सकता है। एजेंसी को मिले शुरुआती इनपुट के अनुसार, गिरोह परीक्षा में अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बैठाने और अन्य तरीकों से मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहा था।
जांच अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई जिलों में फैला हो सकता है। इसी वजह से अब जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और संदिग्ध लोगों से जुड़े सभी संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।
मोबाइल चैट से मिले अहम सुराग
गिरफ्तार गिरोह सरगना अर्पित सिंह के मोबाइल चैट की जांच में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की बात कही जा रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, चैट में कई मेडिकल छात्रों से संपर्क और सॉल्वर के रूप में काम करने की बातचीत के संकेत मिले हैं।
अब ईओयू यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे, अभ्यर्थियों तक पहुंच कैसे बनाई गई और इसके पीछे आर्थिक लेन-देन का क्या खेल था।
12 मेडिकल छात्र जांच के घेरे में
इस मामले में करीब 12 मेडिकल छात्रों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। ईओयू जल्द ही जेल में बंद इन छात्रों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है।
पूछताछ के दौरान एजेंसी यह जानने की कोशिश करेगी कि सॉल्वर गैंग कैसे काम करता था, छात्रों का चयन किस आधार पर किया जाता था और परीक्षा में गड़बड़ी की पूरी योजना किस तरह बनाई गई थी।
कोटा, पावापुरी और PMCH तक पहुंचे तार
जांच में इस फर्जीवाड़े के तार पावापुरी, पीएमसीएच और कोटा से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं था।
जांच एजेंसी अब संबंधित मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों से भी जानकारी जुटा रही है, ताकि संदिग्ध छात्रों और अन्य लोगों के बीच संबंधों की पुष्टि की जा सके।
बायोमीट्रिक सिस्टम की भूमिका की जांच
ईओयू परीक्षा केंद्रों पर इस्तेमाल होने वाली बायोमीट्रिक व्यवस्था की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की तकनीकी या मानवीय लापरवाही का फायदा उठाया गया या नहीं।
लखीसराय केंद्र पर बायोमीट्रिक व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में बताई जा रही है।
आमने-सामने पूछताछ की तैयारी
ईओयू अब गिरफ्तार आरोपितों, मेडिकल छात्रों, सॉल्वरों और अन्य संदिग्धों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। इसके जरिए पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली और इसके पीछे मौजूद मुख्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश होगी।
फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।