Dharmendra Pradhan Resignation: NEET UG 2026 परीक्षा विवाद से शुरू हुआ मामला कुछ ही महीनों में देश की बड़ी राजनीतिक हलचल में बदल गया. परीक्षा रद्द होने, पेपर लीक के आरोप, छात्रों के विरोध, CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, विपक्ष के संसद और सड़क पर प्रदर्शन और 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के बाद यह विवाद लगातार बढ़ता गया. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक करने वालों के खिलाफ सख्त कानून का ऐलान किया. 24 जुलाई को केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक के खिलाफ कड़े प्रावधान वाले ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दी और 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
NEET पेपर लीक का विवाद केवल परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा. मई से जुलाई तक यह मामला छात्रों और युवाओं के आंदोलन से होते हुए संसद के हंगामे और केंद्र सरकार पर बढ़ते राजनीतिक दबाव तक पहुंच गया. जंतर-मंतर पर कई सप्ताह तक धरना चला. विपक्ष ने संसद और सड़क पर सरकार को घेरा. प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को आंदोलन का मुख्य मुद्दा बना दिया.
आखिरकार 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह मामला एक बड़े राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया. इससे एक दिन पहले 24 जुलाई को केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून वाले ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दी थी. इस प्रस्तावित कानून में फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है.
आइए समझते हैं कि मई में शुरू हुआ NEET विवाद जुलाई तक कैसे देश का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया.
3 मई को हुई NEET UG परीक्षा
यह पूरा विवाद मई 2026 में शुरू हुआ. 3 मई 2026 को देशभर में NEET UG परीक्षा आयोजित की गई थी. इस परीक्षा में करीब 22 से 24 लाख छात्र शामिल हुए थे. परीक्षा के कुछ दिन बाद ही परीक्षा प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आने लगीं.
7 मई के आसपास कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि परीक्षा के असली सवाल पहले ही लीक हो गए थे और गेस पेपर के नाम पर छात्रों तक पहुंचाए गए थे. इन आरोपों के सामने आने के बाद परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे और मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा.
12 मई को परीक्षा रद्द
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद 12 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी. परीक्षा रद्द होने की खबर सामने आते ही छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी फैल गई.
मामले की जांच CBI को सौंप दी गई. परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों छात्रों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए. छात्रों का कहना था कि उन्होंने महीनों तक मेहनत कर परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के कारण पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई.
15 मई को शिक्षा मंत्री ने पेपर लीक की बात स्वीकार की
15 मई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस ब्रीफिंग में माना कि पेपर लीक हुआ है. उन्होंने कहा कि यह गड़बड़ी कमांड चेन में हुई एक चूक की वजह से हुई.
शिक्षा मंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष और छात्र संगठनों ने सरकार पर और अधिक दबाव बनाना शुरू कर दिया. छात्रों की मांग थी कि परीक्षा में हुई गड़बड़ी की जिम्मेदारी तय की जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.
21 जून को दोबारा परीक्षा
परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों के भविष्य को देखते हुए 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया. इसके बाद छात्रों के एक वर्ग ने दोबारा परीक्षा में शामिल होकर अपना भविष्य बचाने की कोशिश की, लेकिन परीक्षा रद्द होने से पैदा हुआ गुस्सा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ.
इसी दौरान एक अलग तरह का आंदोलन भी आकार लेने लगा.
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत कैसे हुई
15 और 16 मई को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी चर्चा में आई, जिसमें कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल किया गया था. इसी टिप्पणी से प्रेरित होकर 16 मई को अभिजीत दिपके नाम के एक व्यक्ति ने मजाकिया अंदाज में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP नाम का संगठन बनाया.
शुरुआत में CJP को एक ऑनलाइन मजाक और व्यंग्य के तौर पर देखा गया. लेकिन NEET परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और युवाओं में बढ़ते गुस्से ने इस मंच को एक बड़े आंदोलन में बदल दिया.
धीरे-धीरे बड़ी संख्या में छात्र और युवा इससे जुड़ने लगे. CJP ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी.
6 जून को जंतर-मंतर पर पहला बड़ा प्रदर्शन
6 जून को CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना पहला बड़ा प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में छात्रों और युवाओं ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं.
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार और परीक्षा से जुड़े तनाव के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग शामिल थी.
CJP का कहना था कि NEET जैसी बड़ी परीक्षाओं में पारदर्शिता और भरोसा सबसे जरूरी है. छात्रों का भविष्य किसी भी तरह की लापरवाही या परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की वजह से प्रभावित नहीं होना चाहिए.
20 जून से अनिश्चितकालीन धरना
20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और गंभीर हो गया. CJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया.
प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक वे जंतर-मंतर से नहीं हटेंगे. इसके बाद यह धरना लगातार कई दिनों तक जारी रहा.
इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी आंदोलन से जुड़े. उन्होंने छात्रों की मांगों के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू कर दी. उनकी भूख हड़ताल करीब 26 दिनों तक चली.
सोनम वांगचुक के आंदोलन से जुड़ने के बाद इस प्रदर्शन को और व्यापक समर्थन मिलने लगा. देशभर में इस आंदोलन को लेकर चर्चा तेज हो गई और जंतर-मंतर पर छात्रों, युवाओं और समर्थकों की संख्या बढ़ती गई.
दोबारा परीक्षा के बाद भी नहीं थमा गुस्सा
21 जून को NEET की दोबारा परीक्षा आयोजित की गई. इसके बाद परीक्षा के नतीजे भी घोषित कर दिए गए. हालांकि, परीक्षा दोबारा होने के बावजूद CJP का आंदोलन खत्म नहीं हुआ.
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि केवल परीक्षा दोबारा करा देने से पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा. उनका आरोप था कि परीक्षा प्रणाली में बुनियादी सुधार की जरूरत है और पेपर लीक जैसे मामलों में जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए.
जुलाई में आंदोलन ने लिया बड़ा राजनीतिक रूप
जुलाई का महीना इस पूरे विवाद का सबसे तनावपूर्ण दौर साबित हुआ. जंतर-मंतर पर चल रहा धरना जारी था. विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहा था.
20 जुलाई को CJP ने चलो संसद मार्च का ऐलान किया. प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की. पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी थी. इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी आगे बढ़े.
इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी. पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. इस कार्रवाई में कई लोगों के घायल होने की बात सामने आई.
20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के बाद मामला और गरमा गया. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग की, जबकि विपक्ष ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया.
विपक्ष ने भी सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
20 जुलाई की कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन तेज कर दिया. कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई बड़े नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास लोक कल्याण मार्ग की ओर मार्च किया.
पुलिस ने इन नेताओं को हिरासत में ले लिया. विपक्ष ने इस पूरे मामले में तीन प्रमुख मांगें रखीं.
विपक्ष की मांग थी कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें. 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई की जांच कराई जाए और छात्रों के साथ हुई कार्रवाई को लेकर सार्वजनिक माफी मांगी जाए.
संसद में लगातार हंगामा
इसी दौरान संसद का मॉनसून सत्र भी शुरू हो चुका था. लेकिन NEET विवाद को लेकर संसद की कार्यवाही लगातार प्रभावित होती रही.
विपक्षी सांसद संसद के वेल में पहुंचकर नारेबाजी करते रहे. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन हुआ. इस वजह से लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी.
सरकार लगातार कहती रही कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. लेकिन विपक्ष का कहना था कि पहले शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, उसके बाद ही इस मुद्दे पर चर्चा होगी.
24 जुलाई तक संसद के कई दिन हंगामे की भेंट चढ़ चुके थे. विपक्ष की ओर से यह साफ कहा गया कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते और प्रधानमंत्री छात्रों से माफी नहीं मांगते, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी.
23 जुलाई को प्रधानमंत्री का वीडियो संदेश
इसी बीच 23 जुलाई की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी किया. इस संदेश में उन्होंने पेपर लीक करने वालों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया.
प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने की बात कही, ताकि ऐसे मामलों का जल्द निपटारा हो सके.
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पेपर लीक के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान रखने वाला एक नया बिल जल्द ही कैबिनेट के सामने लाया जाएगा. इसके बाद इसे संसद में पारित कराने की कोशिश की जाएगी.
प्रधानमंत्री ने छात्रों के भविष्य को सबसे महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में कई आरोपी पहले से ही जेल में हैं.
प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया जब एक तरफ CJP का आंदोलन लगातार जारी था और दूसरी ओर संसद में NEET विवाद को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने थे.
24 जुलाई को फिर प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 जुलाई को भी एक वीडियो संदेश जारी किया. इस संदेश के जरिए उन्होंने युवाओं को संबोधित किया.
इसी दिन NEET विवाद को लेकर सरकार की ओर से एक और बड़ा कदम उठाया गया.
कैबिनेट ने पेपर लीक विरोधी ड्राफ्ट बिल को दी मंजूरी
24 जुलाई को केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक के खिलाफ सख्त प्रावधान वाले ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी.
इस प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है. इसमें फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई और दोषियों को कठोर सजा देने की व्यवस्था का प्रस्ताव है.
सरकार की ओर से इसे पेपर लीक के खिलाफ बड़ा कदम बताया गया. इस बिल के जरिए परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले लोगों और गिरोहों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता तैयार करने की बात कही गई.
CJP प्रतिनिधियों की केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात
24 जुलाई को CJP के दो प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रंका केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से दूसरी बार मिले. यह मुलाकात कॉन्स्टीट्यूशन क्लब और विज्ञान भवन में हुई. बैठक के दौरान प्रदर्शनकारियों की मांगों और NEET विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई.
CJP लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहा था.
25 जुलाई को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
आखिरकार 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. यह इस्तीफा ऐसे समय हुआ जब NEET UG 2026 विवाद को लेकर देशभर में लगातार राजनीतिक और सामाजिक दबाव बना हुआ था. एक ओर जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन चल रहा था. दूसरी ओर विपक्ष संसद में लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा था.
इसी बीच सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून लाने की दिशा में कदम बढ़ाया और 24 जुलाई को कैबिनेट ने ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी.
मई में परीक्षा से शुरू हुआ विवाद जुलाई में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक पहुंच गया. इस पूरे घटनाक्रम में NEET परीक्षा, पेपर लीक के आरोप, परीक्षा रद्द होना, दोबारा परीक्षा, CJP का आंदोलन, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, संसद में विपक्ष का विरोध, 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई, प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश और पेपर लीक के खिलाफ प्रस्तावित सख्त कानून जैसे कई बड़े पड़ाव सामने आए.
इस तरह करीब तीन महीने तक चला यह विवाद परीक्षा प्रक्रिया से निकलकर देश के बड़े राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो गया. 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और 24 जुलाई को कैबिनेट द्वारा सख्त कानून वाले ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दिए जाने के साथ इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ा राजनीतिक मोड़ आया.