NEET Paper Leak Case: देशभर में NEET पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलनों के बीच केंद्र सरकार ने आरोपियों के खिलाफ मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया है। इसी क्रम में दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट में 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024' के तहत गठित विशेष अदालत में सोमवार को पहली सुनवाई होनी थी, लेकिन पहले ही दिन यह टल गई।
जानकारी के अनुसार, सुनवाई के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से कोई सरकारी वकील अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। सरकारी वकील की अनुपस्थिति के कारण स्पेशल जज अनु ग्रोवर बलीगा ने मामले की सुनवाई 3 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी। अदालत को इस दौरान NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपियों दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करनी थी।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने डायरेक्टर ऑफ प्रोसिक्यूशन को निर्देश दिया है कि NEET पेपर लीक मामले के लिए जल्द से जल्द एक पब्लिक प्रोसिक्यूटर नियुक्त किया जाए, ताकि अगली सुनवाई में प्रक्रिया प्रभावित न हो। अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त सुबह 10 बजे होगी।
CBI के अनुसार, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल उन 13 आरोपियों में शामिल हैं जिन्हें NEET UG 2026 पेपर लीक साजिश के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि ये आरोपी उस नेटवर्क का हिस्सा थे जिसने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक कर कई अभ्यर्थियों तक पहुंचाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को सोशल मीडिया के माध्यम से पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि देश के युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और पेपर लीक के दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलाने के लिए मामलों का त्वरित निपटारा कराया जाएगा। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया था कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
गौरतलब है कि यह कदम देशभर में NEET पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलनों के बाद उठाया गया है। आंदोलन के दौरान परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और जवाबदेही की मांग की गई थी। सरकार का कहना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए ऐसे मामलों का जल्द निपटारा कर दोषियों को शीघ्र सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी।