केंद्र सरकार ने सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों के खर्चों को नियंत्रित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। वित्त मंत्रालय के इन नए आदेशों का असर देश के बड़े सरकारी बैंक जैसे State Bank of India, Bank of Baroda और Life Insurance Corporation of India समेत कई संस्थानों और वहां काम करने वाले लाखों कर्मचारियों पर पड़ेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब बैठकों और समीक्षा प्रक्रियाओं में अनावश्यक खर्च से बचना होगा। वित्तीय सेवा विभाग के अनुसार अधिकतर बैठकें अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही आयोजित की जाएंगी। केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही आमने-सामने बैठकों की अनुमति दी जाएगी।
विदेश यात्राओं पर नियंत्रण
नए निर्देशों के तहत सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के चेयरमैन, प्रबंध निदेशक और सीईओ की विदेश यात्राओं को सीमित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि जहां संभव हो, अंतरराष्ट्रीय बैठकों और कार्यक्रमों में अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से शामिल हों, जिससे यात्रा और अन्य खर्चों में कमी लाई जा सके।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
सरकार ने सभी संस्थानों को निर्देश दिया है कि पेट्रोल और डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यालयों और शाखाओं में चरणबद्ध तरीके से ईवी अपनाने पर जोर दिया गया है, ताकि ईंधन खर्च कम हो और ऊर्जा बचत को बढ़ावा मिले।
प्रधानमंत्री की अपील के बाद सख्ती
सूत्रों के अनुसार यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद और सख्त हुआ है, जिसमें उन्होंने सरकारी संस्थानों से खर्च में संयम बरतने की बात कही थी। सरकार मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ऊर्जा संकट को देखते हुए यह कदम उठा रही है।
वैश्विक परिस्थितियों का असर
सरकार का मानना है कि दुनिया इस समय कई चुनौतियों से गुजर रही है। कोरोना महामारी के बाद विभिन्न देशों के बीच तनाव और ऊर्जा संकट ने आर्थिक दबाव बढ़ाया है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे महंगाई और आयात लागत बढ़ने की आशंका है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सरकार सरकारी संस्थानों में खर्च नियंत्रण, डिजिटल कार्य प्रणाली और ऊर्जा बचत पर अधिक ध्यान दे रही है। आने वाले समय में इसका असर कर्मचारियों की कार्यशैली, बैठक व्यवस्था और कार्यालय संचालन में स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।