DESK: मध्यप्रदेश के मंदसौर स्थित खानपुरा इलाके में रुण्डी नामक स्थान पर रावण की करीब 35 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। 200 साल पुरानी रावण की इस प्रतिमा की सबसे खास बात यह है कि यहां रावण के माथे के ऊपर गधे का सिर लगा हुआ है। यह रावण की इकलौती प्रतिमा है। यहां कि महिलाएं रावण को दामाद मानती हैं, और उनकी प्रतिमा के सामने आने से पहले घूंघट करती हैं। 


देशभर में दशहरे पर रावण दहन किया जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के मंदसौर में रावण की पूजा होती है। यहां रावण को मंदोदरी का पति और क्षेत्र का दामाद माना जाता है। यही वजह है कि महिलाएं रावण की प्रतिमा के सामने घूंघट करके आती हैं। लेकिन इस प्रतिमा की सबसे अनोखी बात यह है कि रावण के सिर के ऊपर गधे का सिर बना हुआ है। आखिर इसके पीछे क्या मान्यता है और मंदसौर में दशहरा कैसे मनाया जाता है? आइए जानते हैं।


मध्य प्रदेश के मंदसौर के खानपुरा इलाके में रुण्डी नाम की जगह पर रावण की करीब 35 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह प्रतिमा लगभग 200 साल पुरानी है। समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं के कारण इसे नुकसान पहुंचा, लेकिन बाद में इसकी मरम्मत कराई गई। इस प्रतिमा की सबसे खास बात है रावण के सिर के ऊपर बना गधे का सिर। इसे रावण की एक अनोखी प्रतिमा माना जाता है।


स्थानीय मान्यता के मुताबिक, रावण के सिर पर गधे का सिर उसकी बुद्धि और विवेक खत्म होने का प्रतीक है। माना जाता है कि माता सीता का हरण करने के फैसले ने रावण की समझ पर पर्दा डाल दिया था। यही गलती आगे चलकर उसके विनाश की वजह बनी। हालांकि, गधे के सिर से जुड़ी इस व्याख्या का कोई प्रमाणित ऐतिहासिक आधार सामने नहीं है। इसे मंदसौर की स्थानीय मान्यता के तौर पर देखा जाता है।


मंदसौर में रावण को दामाद मानकर सम्मान देने की परंपरा है। मान्यता है कि मंदोदरी का मायका इसी इलाके में था। इसी वजह से यहां रावण को क्षेत्र का दामाद माना जाता है और उसकी पूजा की जाती है। इस परंपरा के तहत महिलाएं रावण की प्रतिमा के सामने जाते समय घूंघट करती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह दामाद के प्रति सम्मान जताने का तरीका है।


दशहरे के दिन मंदसौर में नामदेव समाज के लोग रावण की प्रतिमा के सामने पूजा-अर्चना करते हैं। स्थानीय परंपरा के अनुसार, राम और रावण की सेनाओं से जुड़ा आयोजन भी किया जाता है। मान्यता है कि रावण वध से पहले लोग उसकी प्रतिमा के सामने खड़े होकर क्षमा मांगते हैं। इसके बाद कुछ समय के लिए अंधेरा किया जाता है।


इस तरह मंदसौर में दशहरा बाकी जगहों से अलग अंदाज में मनाया जाता है। यहां रावण केवल बुराई का प्रतीक नहीं, बल्कि स्थानीय मान्यता के अनुसार एक दामाद भी है, जिसका सम्मान किया जाता है। मंदसौर की यह परंपरा दिखाती है कि भारत में दशहरा अलग-अलग जगहों पर अलग मान्यताओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। कहीं रावण का दहन होता है, तो कहीं उसकी पूजा की जाती है।