DESK: नवजात शिशु के लिए मां का दूध सबसे पौष्टिक और सुरक्षित आहार माना जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध के नमूनों में हानिकारक रसायनों और भारी धातुओं की मौजूदगी सामने आई है। 


शोधकर्ताओं ने 100 महिलाओं के स्तनदूध के नमूनों की जांच की, जिसके बाद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मां का दूध अमृत की जगह अब जहर का रूप ले लिया है, इसके पीछे फसलों में अत्यधिक मात्रा में इस्तेमाल किये जाने वाले किटनाशक हैं, जिसने मां के दूध को जहर बनाने का काम किया है। 


अध्ययन के अनुसार, 73 प्रतिशत नमूनों में एफलाटॉक्सिन एम1 और 96 प्रतिशत नमूनों में ओक्राटॉक्सिन पाया गया। इसके अलावा फफूंद से बनने वाले अन्य रसायन जियरालेनोन, अल्फा-जियरालेनोल और बीटा-जियरालेनोल भी कुछ नमूनों में मिले। जांच में क्रोमियम, मैंगनीज, आर्सेनिक, कैडमियम और सीसा जैसी भारी धातुओं की मौजूदगी भी दर्ज की गई।


इन नमूनों में मिलीं भारी धातुएं

अध्ययन में भारी धातुओं की मौजूदगी अलग-अलग प्रतिशत में पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार मैंगनीज: 49 प्रतिशत, आर्सेनिक: 42 प्रतिशत, कैडमियम: 34 प्रतिशत, क्रोमियम: 26 प्रतिशत और सीसा: 12 प्रतिशत पाये गये हैं। 


भोजन और पर्यावरण से शरीर में पहुंच सकते हैं रसायन

शोध के मुताबिक, कुछ विषैले रसायन और भारी धातुएं भोजन तथा पर्यावरण के माध्यम से महिलाओं के शरीर में पहुंच सकती हैं और इसके बाद स्तनदूध में भी इनकी मौजूदगी हो सकती है। शोधकर्ताओं ने आशंका जताई है कि ऐसे पदार्थ स्तनदूध के जरिए नवजात तक पहुंच सकते हैं। इनके लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का खतरा बताया गया है। इससे बच्चों की लीवर और किडनी को नुकसान पहुंच सकता है।  विशेषज्ञों ने फसलों में कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल पर नियंत्रण और इस संबंध में स्पष्ट गाइडलाइन बनाए जाने की जरूरत बताई है।


KGMU के मेडिसिन विभाग के डॉ. डी. हिमांशु के अनुसार, भोजन और पेय पदार्थों के जरिए जहरीले रसायन शरीर में पहुंच सकते हैं, इसलिए कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल को नियंत्रित करने की आवश्यकता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रो. सीमा मल्होत्रा ने भी फसलों में बढ़ते कीटनाशक इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है। फसलों में कीटनाशक का इस्तेमाल किये जाने से महिलाओं के दूध में जहरीले रसायन और हानिकारक पदार्थ मिल रहे हैं। जिससे मां के साथ-साथ बच्चों को भी नुकसान पहुंच सकता है। कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल पर नियंत्रित करना बहुत जरूरी है।