DESK: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखा हमला बोला है। कहा है कि ‘ज्ञानेश कुमार को अब कोई नहीं बचा सकता।’ कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी में मदद करने का आरोप लगाते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इसके साथ ही पार्टी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग भी की।


जयराम रमेश का आरोप है कि मतदाता सूची को सर्च करने योग्य डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध नहीं कराकर चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों की मांग को लगातार नजरअंदाज किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले आठ वर्षों से राजनीतिक दलों को ऐसी मतदाता सूची उपलब्ध कराने की मांग ठुकराई जाती रही, जिसमें मतदाताओं के नाम और उनकी जानकारी आसानी से सर्च की जा सके।


जयराम रमेश के मुताबिक, राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पिछले दो वर्षों से लगातार इस मांग को उठा रहे थे, लेकिन चुनाव आयोग ने बार-बार इसे खारिज कर दिया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश में कथित फर्जी मतदाताओं का मामला सामने आने के बाद से सर्च करने योग्य डिजिटल मतदाता सूची उपलब्ध कराने की व्यवस्था बंद कर दी गई थी। उन्होंने इसे वोट चोरी को लेकर उठाए गए सवालों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि जब-जब वोट चोरी के आरोप सामने आए, तब-तब नए तरीके अपनाए गए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देशों पर काम करने का आरोप मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगाया।


बता दें कि चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी SSR की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एक जनवरी 2027 को पात्रता तिथि निर्धारित की गई है। जयराम रमेश ने दावा किया कि दो साल के अंतराल के बाद सर्च करने योग्य डिजिटल फॉर्मेट में मतदाता सूची उपलब्ध कराने का फैसला लिया गया है। हालांकि, कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को तत्काल रोकने की मांग की है।


जयराम रमेश ने अपने बयान में दावा किया कि SIR की प्रक्रिया से 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के मतदान के संवैधानिक अधिकार पर खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ-साथ चुनाव आयोग और उसकी आईटी व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग की। फिलहाल, कांग्रेस के इन आरोपों और मांगों के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।


जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर ट्वीट करते हुए लिखा कि "पिछले दो वर्षों से लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लगातार, मजबूती से और पुरजोर तरीके से यह मांग करते आ रहे हैं कि भारत निर्वाचन आयोग सभी राजनीतिक दलों को मतदाता सूची ऐसे डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध कराए, जिसमें मतदाताओं के नाम और अन्य जानकारी आसानी से सर्च की जा सके। लेकिन ECI ने बार-बार इस मांग को ठुकराया। दरअसल, 2018 में जब कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में लाखों फर्जी मतदाताओं का पता लगाया था, तभी से ECI ने इस तरह के डिजिटल फॉर्मेट में मतदाता सूची उपलब्ध कराना बंद कर दिया था। वोट चोरी को अंजाम देने के लिए इस मांग को आठ साल तक ठुकराया गया। 


15 अक्टूबर 2026 को ECI ने एक आदेश जारी किया कि Special Summary Revision (SSR) के लिए राजनीतिक दलों को मतदाता सूची ऐसे डिजिटल फॉर्मेट में उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें मतदाताओं की जानकारी आसानी से सर्च की जा सके। दो साल के अंतराल के बाद 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SSR की प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि आज पूरा देश वोट चोरों के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है। हर बार जब वोट चोरी पकड़ी जाती है, मोदी सरकार कोई नया हथकंडा अपना लेती है-कभी मशीन से पढ़ी जा सकने वाली मतदाता सूची देना बंद करना, कभी फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ना, तो कभी SIR। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होने वाला। CEC ज्ञानेश कुमार को अब कोई नहीं बचा सकता। 


उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के निर्देशों पर काम करते हुए ECI पर जनता के भरोसे और विश्वास को पूरी तरह खत्म कर दिया है। उन्हें हर हाल में पद छोड़ना होगा। लेकिन सिर्फ इतना काफी नहीं होगा। ECI और उसके IT सिस्टम में पूरी तरह बदलाव करना होगा। SIR की प्रक्रिया को भी तत्काल रोकना होगा, जिसने 13 करोड़ से अधिक भारतीयों के वोट देने के संवैधानिक अधिकार को खतरे में डाल दिया है।"