ITR Filing 2026: अगर आप इस साल अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की तैयारी कर रहे हैं, तो जल्दबाजी करने से पहले एक जरूरी काम जरूर कर लें। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटर्न भरने से पहले अपने AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS को ध्यान से जांचना बेहद जरूरी है। कई बार बैंकों और वित्तीय संस्थानों की छोटी सी गलती भी टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है।


31 मई बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए SFT (Statement of Financial Transactions) जमा करने की आखिरी तारीख थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आपकी वित्तीय गतिविधियों का रिकॉर्ड आयकर विभाग तक पहुंचता है। अगर इसमें कोई गड़बड़ी रह जाती है, तो उसका असर सीधे आपके ITR और टैक्स रिकॉर्ड पर पड़ सकता है।


क्या है SFT और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 285BA के तहत SFT एक विशेष रिपोर्टिंग सिस्टम है। इसके जरिए बैंक, पोस्ट ऑफिस, म्यूचुअल फंड कंपनियां, शेयर बाजार से जुड़ी संस्थाएं और अन्य वित्तीय संगठन आपके बड़े लेन-देन की जानकारी आयकर विभाग को भेजते हैं।


इस रिपोर्ट में बैंक खाते में जमा रकम, निवेश, शेयरों की खरीद-बिक्री, म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शन, प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री और अन्य बड़े वित्तीय लेन-देन शामिल होते हैं। आयकर विभाग इन्हीं जानकारियों के आधार पर यह जांच करता है कि आपने अपनी आय और निवेश की सही जानकारी ITR में दी है या नहीं।


बैंक की गलती से फंस सकता है आपका ITR

SFT में दर्ज जानकारी सीधे आपके AIS में दिखाई देती है। अगर किसी बैंक या संस्था ने आपके ट्रांजैक्शन की गलत रिपोर्टिंग कर दी, तो मुश्किल खड़ी हो सकती है।

गलत PAN नंबर दर्ज होना, किसी ट्रांजैक्शन को दो बार दिखा देना या गलत राशि दर्ज कर देना जैसी गलतियां अक्सर देखने को मिलती हैं। ऐसे मामलों में आपके ITR और AIS के आंकड़ों में अंतर दिखाई देने लगता है।

अगर यह अंतर ज्यादा हुआ तो आयकर विभाग की तरफ से नोटिस भेजा जा सकता है। इतना ही नहीं, आपका टैक्स रिफंड भी अटक सकता है या फिर रिटर्न को डिफेक्टिव घोषित किया जा सकता है।


ITR फाइल करने से पहले जरूर करें ये काम

सबसे पहले आयकर विभाग के पोर्टल से अपना AIS और Form 26AS डाउनलोड करें। इसके बाद बैंक ब्याज, FD, डिविडेंड, म्यूचुअल फंड निवेश, शेयर बाजार के ट्रांजैक्शन और प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को अपने दस्तावेजों से मिलाएं।

जिन लोगों के जॉइंट अकाउंट या जॉइंट इन्वेस्टमेंट हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। कई बार पूरा ट्रांजैक्शन किसी एक ही व्यक्ति के नाम पर दर्ज हो जाता है, जिससे बाद में टैक्स संबंधी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।

अगर AIS में कोई जानकारी गलत दिखाई देती है तो तुरंत आयकर पोर्टल पर फीडबैक दर्ज करें। साथ ही संबंधित बैंक या संस्था से संपर्क कर रिकॉर्ड को ठीक करवाएं। जितनी जल्दी सुधार की प्रक्रिया शुरू होगी, उतना ही बेहतर रहेगा।


आखिरी तारीख का इंतजार न करें

आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR-1, ITR-2 और ITR-4 फॉर्म ऑनलाइन उपलब्ध करा दिए हैं। सामान्य करदाताओं के लिए बिना लेट फीस ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है।


हालांकि रिकॉर्ड सुधारने और SFT रिपोर्ट अपडेट होने में समय लग सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय अभी से अपने सभी दस्तावेजों और टैक्स रिकॉर्ड की जांच कर लें। इससे न सिर्फ आपका रिफंड समय पर मिलेगा, बल्कि नोटिस और अन्य परेशानियों से भी बचा जा सकेगा।