बड़ा हादसा टला: रामनवमी जुलूस के दौरान तेज आंधी तूफान से बीच सड़क पर गिर गया एलईडी गेट, डाकबंगला में मची अफरातफरी बिहार में शराबबंदी कानून की उड़ाई जा रही धज्जियां, समस्तीपुर मेले में काउंटर लगाकर खुलेआम बिक रही शराब दरभंगा में एम्स निर्माण को मिली रफ्तार, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की ओर बढ़ा बिहार: मंगल पांडेय रामनवमी शोभा यात्रा देख घर लौट रहे दो दोस्त सड़क हादसे के शिकार, एक की मौत, दूसरे की हालत नाजुक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत लगाएंगे जनता दरबार, कहा..समस्याओं का होगा तुरंत समाधान वैशाली में चलती कार से अपहरण, स्कॉर्पियो सवार बदमाश फरार पटना के रामकृष्णा नगर में बड़ी कार्रवाई: 25 KG ड्रग्स के साथ दो धंधेबाज गिरफ्तार सुपौल में ‘पनोरमा स्टार 2026’ का भव्य आयोजन, बॉलीवुड एक्टर चंकी पांडेय होंगे शामिल वैशाली में दर्दनाक हादसा: गंगा में डूबने से दो बच्चियों की मौत Graduation Day Celebration: नन्हे कदमों से नई उड़ान, सपनों के आकाश की ओर पहला कदम
09-Feb-2024 03:10 PM
By First Bihar
DESK: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO अंतरिक्ष में लगातार इतिहास रचने का काम कर रहा है। अब इसरो आगामी 17 फरवरी को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा बनवाए गए आधुनिक मौसम सैटेलाइट INSAT-3DS को लॉन्च करेगा। सैटेलाइट की लॉन्चिंग 17 फरवरी को शाम साढ़े बजे श्रीहिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर होगी। इसको लेकर सभी तरह की तैयारियां की जा रही हैं।
आधुनिक मौसम सैटेलाइट INSAT-3DS सैटेलाइट को लॉन्च करने का मुख्य उद्देश्य जमीन, समंदर, मौसम और इमरजेंसी सिग्नल सिस्टम की जानकारी मुहैया कराना है। इसके अलावा यह सैटेलाइट आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में भी मदद करेगा। इनसैट-3 सीरीज के सैटेलाइट में 6 अलग प्रकार के जियोस्टेशनरी सैटेलाइट्स है और यह सातवां सैटेलाइट है। इनसैट सीरीज के पहले की सभी सैटेलाइट्स को साल 2000 से 2004 के बीच लॉन्च किया गया था। जिससे संचार, टीवी ब्रॉडकास्ट और मौसम संबंधी जानकारियां मिल रही थीं।
ये सभी सैटेलाइट्स भारत और उसके आसपास के मौसमी बदलावों की सटीक और समय से पहले जानकारी देते हैं। अब भारत आधुनिक मौसम सैटेलाइट को लॉन्च करने जा रहा है। इस सैटेलाइट को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने फंडिंग किया है। सैटेलाइट का वजन 2275 किलोग्राम है। इसरो पहले इसे जनवरी में ही लॉन्च करने वाला था लेकन बाद में इसे रीशेड्यूल किया गया था। इसरो के साथ-साथ भारतीय मौसम विज्ञान विभाग इन सैटेलाइटों का संचालन करता है। अब इस अत्याधुनिक सैटेलाइट के जरिए आपदा के पहले इसकी और सटिक जानकारी मिल सकेगी।