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LPG किल्लत से बढ़ी महंगाई: चाय, समोसा और मिठाइयों के बढ़े दाम, रेस्टोरेंट के मेन्यू में 70% तक कटौती

LPG Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के स्थानीय बाजारों में साफ नजर आने लगा है। गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की कमी के कारण महंगाई तेजी से बढ़ रही है, जिससे खाने-पीने की चीजों से लेकर प्लास्टिक, स्टील और केमिकल्स तक के दाम...

17-Mar-2026 10:46 AM

By First Bihar

LPG Crisis: ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखने लगा है। गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति में कमी के कारण बाजार में महंगाई तेजी से बढ़ रही है। इसका सीधा असर रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों पर पड़ रहा है। खाने-पीने की सामग्री, प्लास्टिक, केमिकल और अन्य सामानों के दाम 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। वहीं एलपीजी गैस की किल्लत ने चाय, नाश्ता और मिठाइयों को भी महंगा कर दिया है। गैस सिलेंडर मिलने में पहले जहां 3 से 5 दिन का समय लगता था, अब लोगों को 7 से 10 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।


प्लास्टिक उद्योग पर संकट गहराया

पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति में कमी के कारण प्लास्टिक दाने की कीमतों में भारी उछाल आया है। एक सप्ताह के भीतर इसकी कीमत 125 रुपये प्रति किलो से बढ़कर लगभग 200 रुपये प्रति किलो हो गई है। इसके चलते प्लास्टिक से बनने वाले सामान जैसे कुर्सी, बाल्टी, मग, डब्बा और कैरी बैग के उत्पादन पर असर पड़ने लगा है। कई छोटे उद्योगों के बंद होने का खतरा भी मंडराने लगा है।


चाय और नाश्ते की कीमतों में बढ़ोतरी

गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर छोटे दुकानदारों पर पड़ा है। शहर में चाय की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जो चाय पहले 10 रुपये में मिलती थी, वह अब 12 रुपये में बिक रही है। दुकानदारों का कहना है कि गैस महंगी और कम मिलने के कारण उन्हें मजबूरी में दाम बढ़ाने पड़े हैं। वहीं ग्राहक इसे दुकानदारों का बहाना बता रहे हैं, जिससे कई जगहों पर दोनों के बीच नोक-झोंक भी देखने को मिल रही है।


स्टील और निर्माण सामग्री भी महंगी

वैश्विक स्तर पर अस्थिरता का असर स्टील बाजार पर भी पड़ा है। स्टील और उससे जुड़ी सामग्री की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बीते कुछ दिनों में ही स्टील के दाम प्रति मैट्रिक टन लगभग 100 रुपये तक बढ़ गए हैं। इसके अलावा स्क्रैप और लोहे की कीमतों में भी रोजाना बदलाव देखने को मिल रहा है, जिससे निर्माण कार्यों की लागत बढ़ रही है।


सूखे मेवे और मसाले भी पहुंचे आम आदमी की पहुंच से दूर

विदेशों से आने वाले सूखे मेवे और मसालों की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। इनकी कीमतों में 200 से 250 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही इनकी सप्लाई भी समय पर नहीं हो पा रही है, जिससे व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


मिठाई और समोसे के दाम बढ़े

गैस की किल्लत का असर मिठाई और नाश्ते पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पहले जो समोसा 10 से 12 रुपये में मिलता था, अब वह 15 रुपये प्रति पीस बिक रहा है। इसी तरह रसगुल्ला और गुलाबजामुन की कीमतें भी बढ़कर 20 रुपये प्रति पीस तक पहुंच गई हैं। दुकानदारों का कहना है कि गैस सिलेंडर न मिलने से उत्पादन लागत बढ़ गई है, जिससे दाम बढ़ाना जरूरी हो गया है।


केमिकल महंगे, साबुन और दवाइयों पर असर

ग्लिसरीन की कीमत में 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहले जो ग्लिसरीन 90 रुपये प्रति लीटर मिलता था, वह अब 180 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इसके अलावा पेट्रोलियम जेली, फिनाइल तेल और अन्य केमिकल्स की कीमतों में भी 20 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर आने वाले समय में साबुन, क्रीम और दवाइयों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।


रेस्टोरेंट और होटल कारोबार प्रभावित

पटना में गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर रेस्टोरेंट और होटलों पर पड़ा है। कई रेस्टोरेंट संचालकों को अपने मेन्यू में 70 प्रतिशत तक कटौती करनी पड़ी है। गैस सिलेंडर की कमी के कारण सभी व्यंजन बनाना संभव नहीं हो पा रहा है। कुछ रेस्टोरेंट अब कोयले के चूल्हे का सहारा ले रहे हैं और पारंपरिक तरीके से खाना बना रहे हैं। वहीं गैस की कालाबाजारी भी बढ़ गई है, जिससे वेंडर अधिक दाम मांग रहे हैं।


छात्रों और आम लोगों की बढ़ी परेशानी

गैस की कमी का असर सिर्फ दुकानदारों और व्यापारियों पर ही नहीं, बल्कि छात्रों और आम लोगों पर भी पड़ रहा है। हॉस्टल और लॉज में रहने वाले छात्रों को खाना बनाने में परेशानी हो रही है। कई रेस्टोरेंट कम लागत में खाना उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि छात्रों को राहत मिल सके।