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14-Mar-2026 01:57 PM
By First Bihar
भारत में धर्म का विषय हमेशा से संवेदनशील रहा है। यहां विभिन्न धर्मों और परंपराओं का मिलाजुला माहौल है, इसलिए किसी भी व्यक्ति के धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले गंभीरता से देखे जाते हैं। अलग-अलग राज्यों में धर्मांतरण से जुड़े नियम और सजा की अवधि अलग-अलग है। कुछ राज्यों में कानून काफी सख्त है और इसमें लंबे समय की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने धर्मांतरण पर नया विधेयक पेश किया है, जिसे धर्म स्वतंत्रता बिल 2026 कहा जा रहा है। यह बिल मौजूदा कानूनों की तुलना में और अधिक स्पष्ट और सख्त प्रावधान लेकर आया है। इसमें धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया, नोटिफिकेशन और बच्चों के धर्म से जुड़े नियम भी शामिल हैं।
महाराष्ट्र के प्रस्तावित कानून के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन कराता है और उस दंपत्ति का बच्चा पैदा होता है, तो बच्चे का धर्म मां के विवाह से पहले के धर्म के अनुसार माना जाएगा। इसके अलावा, किसी व्यक्ति को धर्म बदलने से कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना देनी होगी। धर्म परिवर्तन के बाद पोस्ट-कन्वर्जन डिक्लेरेशन देना भी जरूरी होगा। अगर कोई इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे 7 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। गंभीर मामलों में यह सजा बढ़कर 10 साल जेल और 7 लाख रुपये जुर्माना तक हो सकती है।
किन राज्यों में धर्मांतरण कानून है
भारत में कई राज्यों ने पहले से ही जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन रोकने के लिए कानून लागू किए हैं। इन कानूनों का उद्देश्य यह है कि किसी को दबाव, धोखा, लालच या शादी के जरिए धर्म बदलने के लिए मजबूर न किया जाए। ऐसे कानून मुख्य रूप से इन राज्यों में हैं: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश।
इन राज्यों के कानून अलग-अलग तरीके से लागू हैं। उदाहरण के लिए, कुछ राज्यों में धर्म परिवर्तन की जानकारी देना और प्रशासन को नोटिफाई करना अनिवार्य है, जबकि कुछ राज्यों में अवैध धर्मांतरण पर तुरंत सख्त सजा का प्रावधान है। इन कानूनों के तहत अगर किसी व्यक्ति को जबरन धर्म बदलवाया जाता है, तो आरोपी के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज की जा सकती है और अदालत में मुकदमा चल सकता है।
सबसे कड़ी सजा कहां है
धर्मांतरण को लेकर सबसे कड़े कानून उत्तर प्रदेश में हैं। यहाँ 2021 में लागू उत्तर प्रदेश विधि-विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम को 2024 में और सख्त बनाया गया। इस कानून के तहत, अगर कोई व्यक्ति अवैध तरीके से किसी का धर्म बदलवाता है, तो उसे 14 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
अगर पीड़ित नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति से संबंधित है, तो सजा और बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में आरोपी को 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा भी दी जा सकती है। विशेष बात यह है कि ऐसे अपराधों को गैर-जमानती अपराध माना गया है। इसका मतलब है कि आरोपी को जमानत मिलने की संभावना बहुत कम होती है।
राजस्थान में प्रस्तावित सख्त कानून
राजस्थान सरकार ने भी धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून बनाने की तैयारी की है। राज्य में राजस्थान विधिविरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2025 का मसौदा तैयार किया गया है। इसके अनुसार, अगर कोई व्यक्ति जबरन, धोखे से या शादी के जरिए किसी का धर्म बदलवाता है, तो उसे 7 से 14 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना दिया जा सकता है।
अगर पीड़ित नाबालिग लड़की या अनुसूचित जाति/जनजाति की है, तो सजा और बढ़कर 10–20 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा, अगर किसी मामले में सामूहिक धर्मांतरण कराया जाता है, तो आरोपी को 20 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
महाराष्ट्र के प्रस्तावित कानून की खास बातें
महाराष्ट्र का धर्म स्वतंत्रता बिल 2026 पिछले कानूनों की तुलना में और अधिक स्पष्ट है। इसमें केवल धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि बच्चों के धर्म से जुड़े नियम भी शामिल किए गए हैं। अगर कोई व्यक्ति नियमों का पालन नहीं करता है, तो सजा का प्रावधान पहले से काफी सख्त है। इसके तहत, गंभीर अपराधों में 10 साल तक की जेल और 7 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।