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27-Jan-2026 02:11 PM
By First Bihar
India EU Job Opportunities : भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 18 वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लग गई है। इस ऐतिहासिक समझौते का औपचारिक ऐलान होते ही वैश्विक व्यापार जगत में हलचल तेज़ हो गई है। दोनों पक्षों ने टैरिफ में बड़ी कटौती और कई उत्पादों पर शुल्क पूरी तरह समाप्त करने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील’ करार दिया है, जबकि यूरोपीय संघ का कहना है कि इस समझौते से भारतीय बाजार में EU निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी होगी और द्विपक्षीय आर्थिक संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत होंगे।
इस डील का रणनीतिक महत्व भी कम नहीं है। भारत और यूरोपीय संघ, दोनों ही इस समझौते के जरिए चीन और अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता घटाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यूरोपीय संघ के मुताबिक, इस समझौते के तहत भारत को निर्यात किए जाने वाले EU के 90 प्रतिशत से अधिक सामानों पर या तो शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा या फिर उसे काफी हद तक कम किया जाएगा। इससे यूरोपीय निर्यातकों को हर साल लगभग 4 अरब यूरो तक की बचत होने का अनुमान है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी यह समझौता कई मायनों में फायदेमंद माना जा रहा है। उम्मीद है कि 2032 तक भारत से यूरोपीय संघ को होने वाला निर्यात दोगुना हो सकता है। इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, आईटी सर्विसेज और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों में नए निवेश के रास्ते खुलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील के चलते देश में डायरेक्ट और इनडायरेक्ट, दोनों तरह के रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे, जिससे युवाओं को खासा फायदा मिलेगा।
इस समझौते का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर भी दिखेगा। डील के बाद कई आयातित उत्पाद सस्ते हो सकते हैं। कारों से लेकर केमिकल्स तक और वाइन, बीयर व अन्य ड्रिंक्स जैसे उत्पादों के दाम घटने की संभावना है। शराब, खाद्य उत्पाद, रसायन, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और एयरोस्पेस जैसे प्रमुख सेक्टरों में टैरिफ कटौती से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिसका लाभ ग्राहकों को मिलेगा।
यूरोपीय संघ ने इस डील के तहत कई बड़े ऐलान किए हैं। बीयर पर टैरिफ को घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि शराब पर लगने वाले शुल्क में 40 प्रतिशत की कटौती होगी। कार और कमर्शियल व्हीकल्स पर लगने वाला भारी-भरकम 110 प्रतिशत शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है, हालांकि इसके लिए हर साल 2.5 लाख वाहनों का कोटा तय किया गया है। इसके अलावा जैतून के तेल, मार्जरीन और वनस्पति तेलों पर लगने वाले शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिए जाएंगे। फलों के रस और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स पर भी अब कोई टैरिफ नहीं लगेगा।
रासायनिक और औद्योगिक क्षेत्र को भी इस समझौते से बड़ा लाभ मिलने वाला है। यूरोपीय संघ के लगभग सभी रासायनिक उत्पादों पर लगे टैरिफ समाप्त किए जाएंगे। मशीनरी पर लगने वाले 44 प्रतिशत तक के शुल्क और केमिकल्स पर 22 प्रतिशत तक के शुल्क को काफी हद तक खत्म किया गया है। दवाओं और मेडिकल प्रोडक्ट्स पर 11 प्रतिशत तक के शुल्क में भी बड़ी राहत दी गई है। वहीं, एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट पर लगने वाला टैरिफ शून्य कर दिया गया है, जिससे एयरोस्पेस सेक्टर में नई संभावनाएं खुलेंगी।
पर्यावरण और बौद्धिक संपदा के मोर्चे पर भी इस समझौते में अहम प्रावधान किए गए हैं। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के लिए भारत की मदद करने हेतु यूरोपीय संघ अगले दो वर्षों में 500 मिलियन यूरो की सहायता देगा। साथ ही EU के ट्रेडमार्क, डिजाइन, कॉपीराइट और व्यापार रहस्यों के लिए मजबूत सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। छोटे और मझोले उद्योगों (SME) को भी इस डील से मजबूती मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें नए बाजार और बेहतर सप्लाई चेन का लाभ मिलेगा।
कुल मिलाकर, भारत–यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड डील को एक गेम-चेंजर माना जा रहा है। यह न सिर्फ व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगी, बल्कि रोजगार सृजन, तकनीकी सहयोग और टिकाऊ विकास की दिशा में भी दोनों साझेदारों को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकती है।
India EU Job Opportunities : भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 18 वर्षों के लंबे इंतज़ार के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लग गई है। इस ऐतिहासिक समझौते का औपचारिक ऐलान होते ही वैश्विक व्यापार जगत में हलचल तेज़ हो गई है। दोनों पक्षों ने टैरिफ में बड़ी कटौती और कई उत्पादों पर शुल्क पूरी तरह समाप्त करने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील’ करार दिया है, जबकि यूरोपीय संघ का कहना है कि इस समझौते से भारतीय बाजार में EU निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी होगी और द्विपक्षीय आर्थिक संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत होंगे।
इस डील का रणनीतिक महत्व भी कम नहीं है। भारत और यूरोपीय संघ, दोनों ही इस समझौते के जरिए चीन और अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता घटाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यूरोपीय संघ के मुताबिक, इस समझौते के तहत भारत को निर्यात किए जाने वाले EU के 90 प्रतिशत से अधिक सामानों पर या तो शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा या फिर उसे काफी हद तक कम किया जाएगा। इससे यूरोपीय निर्यातकों को हर साल लगभग 4 अरब यूरो तक की बचत होने का अनुमान है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी यह समझौता कई मायनों में फायदेमंद माना जा रहा है। उम्मीद है कि 2032 तक भारत से यूरोपीय संघ को होने वाला निर्यात दोगुना हो सकता है। इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, आईटी सर्विसेज और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों में नए निवेश के रास्ते खुलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील के चलते देश में डायरेक्ट और इनडायरेक्ट, दोनों तरह के रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे, जिससे युवाओं को खासा फायदा मिलेगा।
इस समझौते का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर भी दिखेगा। डील के बाद कई आयातित उत्पाद सस्ते हो सकते हैं। कारों से लेकर केमिकल्स तक और वाइन, बीयर व अन्य ड्रिंक्स जैसे उत्पादों के दाम घटने की संभावना है। शराब, खाद्य उत्पाद, रसायन, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और एयरोस्पेस जैसे प्रमुख सेक्टरों में टैरिफ कटौती से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिसका लाभ ग्राहकों को मिलेगा।
यूरोपीय संघ ने इस डील के तहत कई बड़े ऐलान किए हैं। बीयर पर टैरिफ को घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि शराब पर लगने वाले शुल्क में 40 प्रतिशत की कटौती होगी। कार और कमर्शियल व्हीकल्स पर लगने वाला भारी-भरकम 110 प्रतिशत शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है, हालांकि इसके लिए हर साल 2.5 लाख वाहनों का कोटा तय किया गया है। इसके अलावा जैतून के तेल, मार्जरीन और वनस्पति तेलों पर लगने वाले शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिए जाएंगे। फलों के रस और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स पर भी अब कोई टैरिफ नहीं लगेगा।
रासायनिक और औद्योगिक क्षेत्र को भी इस समझौते से बड़ा लाभ मिलने वाला है। यूरोपीय संघ के लगभग सभी रासायनिक उत्पादों पर लगे टैरिफ समाप्त किए जाएंगे। मशीनरी पर लगने वाले 44 प्रतिशत तक के शुल्क और केमिकल्स पर 22 प्रतिशत तक के शुल्क को काफी हद तक खत्म किया गया है। दवाओं और मेडिकल प्रोडक्ट्स पर 11 प्रतिशत तक के शुल्क में भी बड़ी राहत दी गई है। वहीं, एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट पर लगने वाला टैरिफ शून्य कर दिया गया है, जिससे एयरोस्पेस सेक्टर में नई संभावनाएं खुलेंगी।
पर्यावरण और बौद्धिक संपदा के मोर्चे पर भी इस समझौते में अहम प्रावधान किए गए हैं। ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के लिए भारत की मदद करने हेतु यूरोपीय संघ अगले दो वर्षों में 500 मिलियन यूरो की सहायता देगा। साथ ही EU के ट्रेडमार्क, डिजाइन, कॉपीराइट और व्यापार रहस्यों के लिए मजबूत सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। छोटे और मझोले उद्योगों (SME) को भी इस डील से मजबूती मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्हें नए बाजार और बेहतर सप्लाई चेन का लाभ मिलेगा।
कुल मिलाकर, भारत–यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड डील को एक गेम-चेंजर माना जा रहा है। यह न सिर्फ व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगी, बल्कि रोजगार सृजन, तकनीकी सहयोग और टिकाऊ विकास की दिशा में भी दोनों साझेदारों को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकती है।