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17-Feb-2026 03:02 PM
By First Bihar
INDIA AI IMPACT SUMMIT 2026: भारत में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में देसी स्टार्टअप Sarvam AI ने अपना नया एआई प्लेटफॉर्म Sarvam Edge पेश किया, जिसने तकनीक जगत का ध्यान खींच लिया है। कंपनी का दावा है कि यह एआई मॉडल मोबाइल और लैपटॉप पर बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी काम कर सकता है, जो इसे अन्य बड़े एआई प्लेटफॉर्म से अलग बनाता है।
क्या है Sarvam Edge?
Sarvam Edge एक ऑन-डिवाइस एआई प्रणाली है। इसका मतलब है कि यह क्लाउड पर निर्भर रहने के बजाय सीधे उपयोगकर्ता के डिवाइस पर ही डेटा प्रोसेस करता है। इससे न केवल इंटरनेट की जरूरत कम होती है, बल्कि डेटा की गोपनीयता भी बेहतर रहती है। खास बात यह है कि इसे भारतीय भाषाओं और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
भारत जैसे देश में, जहां अभी भी कई इलाकों में इंटरनेट की गति और उपलब्धता चुनौती बनी हुई है, वहां इस तरह की तकनीक काफी उपयोगी साबित हो सकती है। शिक्षा, सरकारी सेवाओं और छोटे व्यवसायों में इसका इस्तेमाल आसान हो सकता है।
ChatGPT और Gemini से अलग कैसे?
वैश्विक स्तर पर OpenAI का ChatGPT और Google का Gemini क्लाउड आधारित एआई मॉडल हैं, जो बड़े सर्वर और इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भर करते हैं। इसके विपरीत Sarvam Edge सीमित संसाधनों वाले उपकरणों पर भी काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि Sarvam Edge पूरी तरह ChatGPT या Gemini का विकल्प बन गया है, लेकिन यह निश्चित रूप से भारत के लिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर एआई समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भारतीय भाषाओं पर खास ध्यान
Sarvam AI का मुख्य फोकस भारतीय भाषाओं को बेहतर तरीके से समझने और प्रोसेस करने पर है। कंपनी का कहना है कि उनका मॉडल टेक्स्ट, वॉइस और दस्तावेजों को स्थानीय भाषाओं में बेहतर तरीके से समझ सकता है। इससे ग्रामीण और गैर-अंग्रेजी भाषी उपयोगकर्ताओं को सीधा लाभ मिल सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
भारत सरकार भी एआई क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रही है। ऐसे में Sarvam Edge जैसी पहल देश को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। ऑफलाइन एआई की क्षमता इसे खास बनाती है, क्योंकि इससे डिजिटल खाई को कम करने में मदद मिल सकती है।
Sarvam Edge सिर्फ एक नया एआई मॉडल नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम है। अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो आने वाले समय में भारत का एआई क्षेत्र वैश्विक मंच पर और मजबूत होकर उभर सकता है।