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02-Apr-2026 03:54 PM
By First Bihar
Income Tax Form 121 : 1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव लागू हो गया है, जिसका सीधा असर सीनियर सिटीजन और कम आय वाले करदाताओं पर पड़ेगा। सरकार ने TDS (Tax Deducted at Source) से जुड़ी पुरानी प्रक्रिया को आसान बनाते हुए अब Form 15G और Form 15H को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इन दोनों फॉर्म्स की जगह अब एक नया एकीकृत Form 121 लागू किया गया है, जिससे टैक्स सिस्टम को और सरल और डिजिटल बनाने की कोशिश की गई है।
अब खत्म हुए 15G और 15H के झंझट
अब तक टैक्स बचाने के लिए लोगों को अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते थे। 60 साल से कम उम्र के लोगों के लिए Form 15G और वरिष्ठ नागरिकों के लिए Form 15H का उपयोग किया जाता था। लेकिन नए नियमों के तहत यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
अब चाहे कोई भी व्यक्ति हो—चाहे उसकी उम्र 25 साल हो या 75 साल—अगर उसकी कुल टैक्स योग्य आय (Taxable Income) शून्य है, तो वह सिर्फ एक ही फॉर्म यानी Form 121 भरकर TDS कटौती से बच सकता है। इसका उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाना और कागजी कार्यवाही को कम करना है।
Form 121 क्या है और कैसे काम करेगा?
नया Form 121 एक डिजिटल और यूनिफाइड डिक्लेरेशन सिस्टम है। इसमें करदाता को यह घोषित करना होगा कि उसकी कुल आय टैक्स छूट सीमा से कम है और उस पर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती।इस फॉर्म के भरने के बाद संबंधित बैंक या संस्था इस डिक्लेरेशन को स्वीकार करेगी और उसी आधार पर TDS नहीं काटा जाएगा। यह सिस्टम पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और ऑटोमेटेड होगा।
किन-किन आय पर मिलेगा TDS से राहत का फायदा?
Form 121 के जरिए कई प्रकार की आय पर TDS से राहत मिल सकेगी। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और सेविंग अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज
कर्मचारी भविष्य निधि (PF) से निकासी और पेंशन भुगतान
किराये की आय (Rental Income)
डिविडेंड और म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई
इंश्योरेंस कमीशन और जीवन बीमा पॉलिसी से प्राप्त राशि
इस बदलाव से छोटे निवेशकों और वरिष्ठ नागरिकों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब उन्हें बार-बार अलग-अलग फॉर्म जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
नया UIN सिस्टम क्या है?
Form 121 के साथ सरकार ने एक नया Unique Identification Number (UIN) सिस्टम भी लागू किया है। जब कोई व्यक्ति Form 121 (Part A) जमा करेगा, तो संबंधित बैंक या संस्था उसे 26 अंकों का एक यूनिक नंबर जारी करेगी।
इस UIN में कई महत्वपूर्ण जानकारी शामिल होगी, जैसे:
करदाता की बेसिक डिटेल्स
टैक्स वर्ष (जैसे 2026-27)
बैंक का TAN नंबर
यह नंबर हर डिक्लेरेशन को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी।
बैंकों पर भी बढ़ी जिम्मेदारी
नए नियमों के तहत केवल फॉर्म स्वीकार करना ही नहीं, बल्कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों को हर तिमाही सरकार को रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा। उन्हें यह बताना होगा कि कितने ग्राहकों ने Form 121 जमा किया है और किन खातों पर TDS नहीं काटा गया।
टैक्स सिस्टम को आसान बनाने की दिशा में कदम
सरकार का दावा है कि यह बदलाव टैक्स सिस्टम को सरल, डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे न केवल करदाताओं का समय बचेगा बल्कि बैंकिंग और टैक्स प्रोसेस भी पहले से अधिक तेज और आसान हो जाएगा। नए नियमों के लागू होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि आम लोगों को टैक्स से जुड़ी जटिलताओं से काफी राहत मिलेगी और पूरी प्रक्रिया एक ही फॉर्म में सिमट जाएगी।