DESK:यूरोप इस समय भीषण हीटवेव की चपेट में है। रिकॉर्डतोड़ गर्मी ने कई देशों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। फ्रांस में भीषण गर्मी के कारण करीब 1,000 लोगों की मौत होने की खबर आ रही है। फ्रांस की स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, 24 जून से 27 जून के बीच हुई मौतों की संख्या सामान्य औसत से काफी अधिक है।


अधिकारियों के मुताबिक, मृतकों में करीब 85 प्रतिशत बुजुर्ग शामिल हैं और अधिकांश मौतें घरों के भीतर हुई हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र राजधानी पेरिस और उसके आसपास के इलाके रहे हैं। वहीं जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन, डेनमार्क, इटली और स्विट्जरलैंड समेत यूरोप के 16 देशों में तापमान ने दशकों पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।


समाचार एजेंसी एएफपी के अनुमान के अनुसार, रविवार को यूरोप के लगभग 19.1 करोड़ लोगों को 35 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान का सामना करना पड़ा। कई देशों में सड़कें पिघलने लगी हैं, स्कूलों को बंद करना पड़ा है और जंगलों में भीषण आग की घटनाएं सामने आई हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोप का तापमान वैश्विक औसत की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में इस तरह की हीटवेव अधिक बार आएंगी और इनकी अवधि भी लंबी होगी।


ब्रिटेन में 50 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

ब्रिटेन में जून महीने के दौरान गर्मी का 50 वर्ष पुराना रिकॉर्ड लगातार तीन बार टूटा है। दक्षिणी इंग्लैंड में तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो जून महीने का नया रिकॉर्ड है। गर्मी के कारण 1,000 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जबकि कई अस्पतालों को इमरजेंसी घोषित करना पड़ा है।


स्पेन में 45 डिग्री के पार पहुंचा पारा

स्पेन इस समय यूरोप का सबसे गर्म देश बना हुआ है। एंडुजार शहर में तापमान 45.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले चार दिनों में गर्मी के कारण 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं भीषण गर्मी और सूखे के कारण जंगलों में आग की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं।


जर्मनी में इतिहास का सबसे अधिक तापमान

जर्मनी के ड्रैविट्ज शहर में तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो देश के इतिहास का सबसे अधिक तापमान है। अत्यधिक गर्मी के कारण कई सड़कों को बंद करना पड़ा है, जबकि खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को रद्द या स्थगित कर दिया गया है।


फ्रांस में स्कूल बंद, बिजली संकट

फ्रांस के पिसोस शहर में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। देश में भीषण गर्मी के कारण 1,350 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं। इसके अलावा बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है, जिससे हजारों घर अंधेरे में हैं।


इटली, डेनमार्क और अन्य देशों में भी अलर्ट

इटली के 18 शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। डेनमार्क में 1874 के बाद पहली बार तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा है। वहीं स्विट्जरलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल और चेक रिपब्लिक में भी रिकॉर्डतोड़ गर्मी दर्ज की गई है।


भारत में सामान्य, यूरोप में आपदा क्यों?

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और यूरोप के बीच जलवायु, आधारभूत संरचना और लोगों की शारीरिक अनुकूलन क्षमता में बड़ा अंतर है। भारत में घरों का निर्माण गर्मी को ध्यान में रखकर किया जाता है, जबकि यूरोप की इमारतें ठंड से बचाव के लिए बनाई जाती हैं। यही वजह है कि 40 डिग्री सेल्सियस तापमान भारत में सामान्य माना जाता है, जबकि यूरोप में यह आपदा का रूप ले लेता है।