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27-Oct-2025 01:30 PM
By First Bihar
Election Commission : आज भारत निर्वाचन आयोग (ECI) देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की घोषणा करने जा रहा है। सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोग इस प्रक्रिया को लागू करने की रूपरेखा बताएगा, और अगले हफ्ते से इसे कई राज्यों में लागू किए जाने की संभावना है।
क्या है SIR
SIR का पूरा नाम “Special Intensive Revision” है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची (electoral rolls) में व्यापक रूप से सुधार करना है—नामों की शुद्धता सुनिश्चित करना, मृत या प्रवासी मतदाताओं को हटाना, नए योग्य मतदाताओं को जोड़ना, स्थानांतरण, सुधारें आदि करना।
यह एक सामान्य सालाना अद्यतन प्रक्रिया नहीं है, बल्कि विशेष परिस्थिति में आयोग द्वारा निर्णय लेने पर लागू की जाती है।
क्यों की जा रही है यह प्रक्रिया?
मतदाता सूची में अक्सर मृत व्यक्तियों, प्रवासी मतदाताओं तथा डुप्लिकेट प्रविष्टियों जैसी गड़बड़ियाँ पाई जाती हैं, जिससे सूची की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। SIR इन्हीं खामियों को दूर करने के लिए है।
आगामी राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुए, आयोग ने कहा है कि जहाँ अगले साल चुनाव होने हैं वहाँ पहले चरण में SIR लागू किया जाएगा।
उदाहरण के लिए, बिहार में SIR प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है, जिससे बिट्यु मामला बन गया है।
क्या बताया जा रहा है आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में?
आयोग आज यह घोषणा करेगा कि SIR प्रक्रिया देशव्यापी रूप से लागू की जाएगी और इसके पहले चरण में किन-किन राज्यों को शामिल किया गया है।
साथ ही, अगले हफ्ते से यह प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
यह भी बताया जाएगा कि किस तरह से राज्यों को निर्देश दिए गए हैं, किस समयसीमा में कार्य पूरा होना है, और राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची अद्यतन का प्रारूप क्या रहेगा।
आयोग ने पहले ही राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस संबंध में तैयारी करने कहा है।
पहले चरण में किन राज्यों में यह लागू होगा?
सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में निम्नलिखित राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया जा सकता है: असम, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल
इनमें शामिल राज्यों में अगली विधानसभा चुनाव तय हैं, इसलिए वहां सूची को जल्दी से अपडेट करना ज़रूरी माना गया है।
क्या चुनौतियाँ और विवाद हैं?
SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने आरोप लगाए हैं कि “नाम कट रहे हैं”, “नए मतदाता जोड़े जा रहे हैं” आदि। उदाहरण के लिए, बिहार में इस प्रक्रिया के दौरान नए मतदाताओं को जोड़ने और पुराने नाम हटाने को लेकर विवाद हुआ था।
यह भी कहा गया है कि प्रक्रिया जल्दबाजी में हो सकती है, जिससे मतदाता-विश्वास प्रभावित हो सकता है।
आयोग ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि ऐसी गड़बड़ियों को न्यूनतम किया जाए।
जनता के लिए क्या मायने रखेगा?
अगर आपका नाम सूची में नहीं है या गलत जानकारी है, तो इसे सुधारना महत्त्वपूर्ण होगा। इस प्रक्रिया के दौरान हर योग्य मतदाता को समय पर नामांकन, स्थानांतरण या सुधार कराना होगा।
यह सुनिश्चित करने का अवसर है कि आप आगामी चुनाव में अपना मत डाल सकें।
अगर विरोध या शिकायत हो, तो संबंधित मुख्य निर्वाचन कार्यालय में समय रहते संपर्क करना होगा।