DESK:  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा और वित्तीय अनियमितताओं के विवाद को लेकर केंद्र सरकार और संबंधित ट्रस्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में केवल छोटे लोगों पर कार्रवाई हुई है, जबकि बड़े जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही अब तक तय नहीं की गई है।


मंगलवार को मीडिया से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और राम मंदिर का विषय राजनीति नहीं, बल्कि श्रद्धा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद मंदिर का निर्माण पूरा हुआ, लेकिन अब उससे जुड़े वित्तीय मामलों पर सवाल उठ रहे हैं।


उन्होंने दावा किया कि मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों ने भी अनियमितताओं की ओर संकेत किया है। साथ ही उन्होंने सवाल किया कि यदि वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं, तो संबंधित जांच एजेंसियां इस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं कर रही हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मामले में केवल "छोटी मछली" पकड़ी गई है, जबकि "मगरमच्छ" अब भी जांच के दायरे से बाहर हैं। उनका कहना था कि वास्तविक जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय किए बिना कार्रवाई अधूरी मानी जाएगी।


कांग्रेस नेता ने कहा कि वह इस मुद्दे को धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय मानते हैं और इसकी निष्पक्ष जांच की मांग करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर वह अपनी "आखिरी सांस तक लड़ाई" लड़ेंगे और इस अभियान को किसी राजनीतिक दल के झंडे के बजाय धार्मिक जवाबदेही के मुद्दे के रूप में आगे बढ़ाएंगे।


दिग्विजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि धर्म के नाम पर आर्थिक गतिविधियां और व्यापार बढ़ रहा है, जबकि धर्म का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, न कि विभाजित करना। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों का समान सम्मान होना चाहिए और किसी भी धर्म या उसके अनुयायियों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।


उन्होंने विशेष जांच दल (एसआईटी) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में वास्तविक तथ्यों को सामने लाने और दोषियों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है। हालांकि, राम मंदिर ट्रस्ट या संबंधित पक्ष की ओर से दिग्विजय सिंह के इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।