DESK: कुंवारों को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट उत्तराखंड के देहरादून से निकलकर सामने आई है। जहां 35000 युवाओं पर मात्र 11000 लड़कियां हैं। जबकि 80 साल की उम्र वाले 5700 से अधिक लोग अभी भी तन्हा जीवन गुजार रहे हैं। शादी के इंतजार में ये उम्र के अंतिम पड़ाव पर आ गये हैं।
विवाह योग्य युवाओं को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सांख्यिकी विभाग की सामने आई है। इसके अनुसार यहां लड़कों और लड़कियों के अनुपात में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है, जिसके कारण युवाओं को जीवनसाथी तलाशने में कठिनाई हो रही है। सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट से पता चलता है कि 25 से 34 वर्ष वर्ग में करीब 35,000 युवक हैं, जबकि उनके मुकाबले केवल करीब 11,836 लड़कियां ही उपलब्ध हैं। यानी औसतन तीन लड़कों पर मात्र एक लड़की है। 30 से 34 वर्ष के आयु वर्ग में भी यही स्थिति बनी हुई है। जहां 10,103 युवक हैं, वहीं केवल 3,031 लड़कियां हैं।
इस असंतुलन का असर यह है कि बड़ी संख्या में युवक विवाह के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं। देहरादून में 35 वर्ष से अधिक उम्र के 7,025 से ज्यादा पुरुष अब तक अविवाहित हैं, जिनमें से 3,281 पुरुष 40 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं। स्थिति केवल युवाओं तक सीमित नहीं है। 60 से 80 वर्ष की आयु वर्ग में भी 5,714 से अधिक पुरुष अकेले जीवन जी रहे हैं, जबकि ऐसी महिलाओं की संख्या 2,968 है।
पहाड़ी क्षेत्रों में यह समस्या पहले से ही देखी जा रही थी, जहां विवाह योग्य लड़कियों की कमी के चलते नेपाल तक से रिश्ते किए जा रहे हैं। अब यह समस्या राजधानी देहरादून तक पहुंच चुकी है। अक्सर इस स्थिति के लिए लड़कियों की अपेक्षाओं को जिम्मेदार ठहराया जाता है, जैसे कि नौकरी और शहर में घर की मांग। हालांकि, रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि असली कारण लिंगानुपात में असंतुलन है, न कि लड़कियों की बढ़ती अपेक्षाएं।