DESK: उत्तराखंड के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ एलीफैंट कैंप में आयोजित एक विदाई समारोह उस वक्त भावुक पल में बदल गया, जब 60 वर्षीय वन दारोगा भारत सिंह रावत अपनी प्रिय हथिनी 'मालिनी' से बिछड़ने का दर्द सहन नहीं कर सके। नौकरी के अंतिम दिन उन्होंने पहले हथिनी के पैर छुए, फिर उसे गले लगाकर फूट-फूटकर रो पड़े। यह मार्मिक दृश्य देखकर वहां मौजूद वन अधिकारी, कर्मचारी, महावत और अन्य लोग भी भावुक हो गए।
मालन नदी से रेस्क्यू हुई थी नन्हीं हथिनी
सितंबर 2025 में कोटद्वार की मालन नदी से वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने महज 15 से 20 दिन की एक मरणासन्न हथिनी को बचाया था। उसकी हालत बेहद गंभीर थी। सुरक्षित रेस्क्यू के बाद उसे कालागढ़ एलीफैंट कैंप लाया गया। मालन नदी में मिलने के कारण उसका नाम 'मालिनी' रखा गया। बाद में 19 फरवरी 2026 को उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल की मौजूदगी में उसका विधिवत नामकरण भी किया गया।
भारत सिंह ने बेटी की तरह की परवरिश
मालिनी के कैंप पहुंचने के बाद उसकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी वन दारोगा भारत सिंह रावत ने अपने हाथों में ले ली। उन्होंने उसे सिर्फ एक वन्यजीव नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह अपनाया। समय पर दूध पिलाना, दवाइयां देना, पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना और उसके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखना उनकी दिनचर्या बन गई थी।
भारत सिंह ने कैंप के कर्मचारियों को भी निर्देश दे रखे थे कि मालिनी की देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उनकी अथक मेहनत और समर्पण का ही परिणाम रहा कि जब मालिनी कैंप में लाई गई थी तब उसका वजन लगभग 85 किलोग्राम था, जो अब बढ़कर करीब 280 किलोग्राम हो चुका है।
रिटायरमेंट पर छलक पड़े आंसू
सेवानिवृत्ति के दिन जब भारत सिंह को मालिनी से विदा लेना पड़ा, तो वे अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। उन्होंने पहले हथिनी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और फिर उसे गले लगाकर फूट-फूटकर रो पड़े। इस भावुक पल ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।
जंगल और वन्यजीवों की सेवा को बनाया जीवन का मिशन
विदाई समारोह में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भारत सिंह रावत की ईमानदारी, समर्पण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति उनके जुनून की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत सिंह ने अपने पूरे सेवाकाल में जंगल और वन्यजीवों की रक्षा को केवल नौकरी नहीं, बल्कि अपने जीवन का उद्देश्य माना।
अब रक्षित पांडेय संभालेंगे जिम्मेदारी
वर्तमान में कालागढ़ एलीफैंट कैंप में गजराज, लक्षमा, सावन और मालिनी सहित चार हाथी हैं। इनकी देखभाल के लिए महावत, चाराकटर और अन्य कर्मचारी तैनात हैं। भारत सिंह रावत के सेवानिवृत्त होने के बाद अब एलीफैंट कैंप की जिम्मेदारी रक्षित पांडेय को सौंपी गई है।
अधिकारियों ने बताया संवेदनाओं का रिश्ता
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने कहा कि वनकर्मी लंबे समय तक जिन वन्यजीवों की देखभाल करते हैं, उनसे उनका गहरा भावनात्मक रिश्ता बन जाता है। ऐसे में जब सेवा परिवर्तन या सेवानिवृत्ति के कारण उनसे अलग होना पड़ता है, तो वह पल बेहद भावुक होता है। भारत सिंह रावत और हथिनी मालिनी की यह विदाई केवल एक कर्मचारी और वन्यजीव की कहानी नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा, समर्पण और इंसान तथा बेजुबान जीवों के बीच अटूट रिश्ते का ऐसा उदाहरण है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।