Supreme Court Hearing News: नीट प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने के आरोपों पर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की जरूरत बताई. कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि मामले की जांच के लिए उसके किसी पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल यानी SIT या हाई-पावर्ड कमेटी गठित की जा सकती है.


जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं. पीठ ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के व्यवहार, दोनों की जांच होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि अगर किसी ने कानून अपने हाथ में लिया है या किसी तरह की ज्यादती की है तो जांच के बाद उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए.


सुप्रीम कोर्ट के 5 बड़े निर्देश

1. नाबालिग प्रदर्शनकारियों को राहत

सुप्रीम कोर्ट ने उन प्रदर्शनकारी छात्रों को रिहा करने का निर्देश दिया, जिनकी उम्र 18 साल से कम है और जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है. वहीं दिल्ली सरकार को दर्ज प्राथमिकी के मामलों में जांच जारी रखने की अनुमति दी गई, लेकिन जांच लंबित रहने तक प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ बलपूर्वक कार्रवाई नहीं करने को कहा गया.


कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को इस निर्देश के तहत कोई राहत नहीं मिलेगी. जिन प्रदर्शनकारियों का आपराधिक रिकॉर्ड है, उनके मामलों में जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है.


2. CCTV और डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है. जिन राज्यों में छात्र प्रदर्शन हुए हैं, वहां अधिकारियों को CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड, PCR लॉग और दूसरे डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने को कहा गया है.


कोर्ट के मुताबिक जांच के दौरान ये रिकॉर्ड घटनाओं की वास्तविक स्थिति समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं. इसलिए इन्हें सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि बाद में जांच के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो.


3. पुलिस कार्रवाई और छात्रों पर लगे आरोपों की स्वतंत्र जांच

सुनवाई के दौरान छात्रों के साथ कथित पुलिस ज्यादती के आरोपों का भी मुद्दा उठा. याचिकाओं में पुलिस पर लाठीचार्ज, आंसू गैस, पेलेट गन, इलेक्ट्रिक शॉक हथियारों के इस्तेमाल और सुरक्षाकर्मियों द्वारा मारपीट जैसे आरोप लगाए गए हैं.


सुप्रीम कोर्ट ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया इन आरोपों की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की जरूरत दिखाई देती है. कोर्ट ने मामले की जांच के लिए SIT या हाई-पावर्ड कमेटी बनाने का संकेत दिया है.


4. पुलिसकर्मियों पर हमले की भी होगी जांच

CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान जवाबदेही पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने कानून अपने हाथ में लिया या ज्यादती की है तो उसे कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए.


पीठ ने पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की जांच की जरूरत पर भी जोर दिया. कोर्ट ने कहा कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि पुलिसकर्मियों पर हमला करने वाले वास्तव में छात्र थे या फिर प्रदर्शन में शामिल हुए अन्य लोग.


सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के बीच 200 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात भी सामने आई. CJI ने कहा कि जांच के दौरान घायल पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की चिंताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.


5. विरोध प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय प्रोटोकॉल की जरूरत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन होते हैं, लेकिन ऐसे प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई के लिए एक स्पष्ट और समान राष्ट्रीय प्रोटोकॉल होना चाहिए.


कोर्ट के मुताबिक भविष्य में होने वाले प्रदर्शनों में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं. पीठ ने संकेत दिया कि प्रस्तावित जांच केवल हालिया घटनाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इससे भविष्य में सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई और भीड़ नियंत्रण को लेकर बेहतर दिशा-निर्देश तैयार करने में भी मदद मिलनी चाहिए.


इन राज्यों से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों से जवाब मांगा है. इन राज्यों में हुए प्रदर्शनों से जुड़े आरोपों और पुलिस कार्रवाई को लेकर संबंधित सरकारों को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा.


सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले में कई अंतरिम निर्देश जारी किए हैं. अदालत की आगे की सुनवाई में यह तय हो सकता है कि आरोपों की जांच के लिए SIT गठित होगी या हाई-पावर्ड कमेटी बनाई जाएगी.