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06-Mar-2026 01:40 PM
By First Bihar
8th pay commission : केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के पेंशन सुधार को लेकर बहस फिर से तेज हो गई है। 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही कर्मचारी संगठनों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूरी तरह बहाल करने की मांग जोर-शोर से उठाई है। उनका कहना है कि नई पेंशन प्रणालियों में पेंशन की निश्चितता नहीं है, जिससे कर्मचारियों के भविष्य की आर्थिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
कर्मचारी संगठनों की मांगें
केंद्रीय कर्मचारियों और श्रमिकों के संगठन, जैसे अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (AIDEF) और केंद्रीय कर्मचारी संगठन, ने अपनी मांगें राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्श तंत्र (NC-JCM) की स्टाफ साइड की ड्राफ्टिंग कमेटी को सौंप दी हैं। इन संगठनों ने स्पष्ट कहा कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और हाल ही में लागू यूनिफाइड पेंशन सिस्टम (UPS) दोनों को खत्म कर पुनः OPS लागू किया जाए। OPS में रिटायरमेंट के बाद अंतिम वेतन का लगभग 50% पेंशन और महंगाई भत्ता (DA) मिलता था, जिससे कर्मचारी आर्थिक रूप से सुरक्षित रहते थे।
UPS में कम कर्मचारियों की भागीदारी
सरकार ने UPS के विकल्प के तहत न्यूनतम पेंशन का भरोसा देने की कोशिश की थी, लेकिन प्रतिक्रिया उम्मीद से कम रही है। संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 30 नवंबर 2025 तक केवल 1,22,123 कर्मचारियों ने ही UPS को चुना, जबकि कुल पात्र कर्मचारियों की संख्या लगभग 23–25 लाख थी। यानी कुल कर्मचारियों में केवल 4–5% ने नई पेंशन प्रणाली अपनाई। कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि यह भरोसे की कमी का संकेत है।
OPS बनाम NPS और UPS
OPS में पेंशन निश्चित थी और महंगाई भत्ते के साथ यह कर्मचारियों की जीवनशैली बनाए रखने में मदद करता था। NPS में पेंशन का निर्धारण बाजार के रिटर्न पर होता है, जिससे भविष्य की आय अनिश्चित हो जाती है। UPS ने न्यूनतम पेंशन का विकल्प दिया, लेकिन यह भी कर्मचारियों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा।
सरकार का रुख
सरकार ने अब तक कहा है कि OPS को दोबारा लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। उनका कहना है कि NPS और UPS लंबी अवधि में सरकारी खजाने पर पेंशन के भारी बोझ को कम करने के लिए जरूरी हैं। UPS में न्यूनतम पेंशन का भरोसा दिया गया है, जिससे कर्मचारियों को कुछ सुरक्षा मिले, लेकिन वित्तीय संतुलन बनाए रखा जा सके।
8वें वेतन आयोग और पेंशन सुधार
8वें वेतन आयोग की बैठकों के दौरान पेंशन सुधार सबसे बड़ा विवादित विषय बन सकता है। कर्मचारी संगठन इसे जोर-शोर से उठाने की तैयारी में हैं, जबकि सरकार वित्तीय संतुलन बनाए रखने के पक्ष में है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वेतन आयोग की सिफारिशों में पेंशन व्यवस्था को लेकर क्या बदलाव आते हैं।
केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन बहस वित्तीय स्थिरता और कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बन गई है। OPS की बहाली या UPS में सुधार की दिशा में फैसले अगले वेतन आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेंगे। इस बहस का असर न केवल कर्मचारियों पर पड़ेगा, बल्कि सरकारी खजाने और भविष्य की पेंशन योजनाओं के स्वरूप को भी प्रभावित करेगा।