DESK: एक ओर जहां देश के युवा महंगाई और बेरोजगारी से परेशान है। अच्छी तालिम हासिल करने के बावजूद समय पर नौकरी तक नहीं लग पा रही है। नौकरी की तलाश में युवा लगे रहते हैं, जिसके कारण ज्यादा उम्र में शादी करते हैं। लेट से शादी करने के कारण बच्चों का जन्मदर कम हो गया है। यही कारण है कि सनातनियों में जन्मदर 1.9 हो गया है। जो कि चिंताजनक है।
इसे लेकर मध्य प्रदेश के बड़वानी में भारतीय जनता पार्टी (BJP)के सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने हिंदू युवाओं से जल्दी शादी करने और पांच-पांच बच्चे पैदा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि समाज को इस दिशा में गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। लेकिन सवाल यह उठता है कि इतनी महंगाई और बेरोजगारी में कोई पांच-पांच बच्चा कैसे पैदा करेगा। उन बच्चों की परवरिश करना मुश्किल साबित होगा। लेकिन बीजेपी नेता जनसंख्या बढ़ाने की बात कर रहे हैं।
भाजपा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने युवाओं में बढ़ते नशे के चलन और दिखावे की संस्कृति पर भी चिंता जताई। उन्होंने जिम और पारंपरिक कुश्ती के अखाड़ों को बढ़ावा देने की बात कही। साथ ही, उन्होंने कहा कि भक्ति के साथ युवाओं में शारीरिक ताकत और आत्मरक्षा की क्षमता भी होनी चाहिए।
‘सनातनियों में जन्म दर 1.9’
गजेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि पहले की पीढ़ियों में परिवारों में चार, पांच, छह या सात तक बच्चे होते थे और लोग कम उम्र में शादी कर लेते थे। उन्होंने दावा किया कि आज लोग 30 से 37 साल की उम्र में शादी कर रहे हैं और परिवार में बच्चों की संख्या भी कम हो गई है। सांसद ने कहा कि इसी वजह से सनातनियों में जन्म दर 1.9 रह गई है। उन्होंने हिंदू युवाओं से अपील करते हुए कहा कि उन्हें समय पर शादी करनी चाहिए और पांच-पांच बच्चे पैदा करने चाहिए।
‘3D’ कैंपेन का किया जिक्र
सांसद ने अपने ‘3D’ कैंपेन का भी जिक्र किया। उन्होंने DJ, ड्रग्स और दहेज को समाज के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए युवाओं से इनसे दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं में नशे का चलन बढ़ रहा है और दिखावे की संस्कृति भी समाज को प्रभावित कर रही है। सांसद ने युवाओं से समाज को मजबूत बनाने और नशे जैसी समस्याओं के खिलाफ जागरूकता फैलाने की अपील की।
भक्ति के साथ ताकत पर भी दिया जोर
गजेंद्र सिंह पटेल ने माता की भक्ति के साथ-साथ युवाओं में शारीरिक मजबूती और आत्मरक्षा की भावना विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने जिम और पारंपरिक अखाड़ों को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में सनातनी एक-दूसरे का साथ देंगे और केवल राजनीतिक दलों पर निर्भर नहीं रहेंगे। सांसद ने 1947 और 1967 के दौर तथा 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए समुदायों की आबादी में बदलाव का मुद्दा भी उठाया।