Bihar Weather Update: बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान का असर बिहार के मौसम पर भी पड़ने वाला है. मौसम विज्ञान केंद्र, पटना ने 28 अक्टूबर से 1 नवंबर तक राज्य में बारिश और वज्रपात को लेकर चेतावनी जारी की है. इस दौरान कई इलाकों में तेज हवा के साथ मेघगर्जन और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है. दक्षिण बिहार और सीमांचल के जिलों में मौसम का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है.


मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी और उससे सटे पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी तथा अंडमान द्वीपसमूह के ऊपर बने वायुमंडलीय चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से 23 अक्टूबर को निम्न दबाव का क्षेत्र बना है. यह परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है.


24 अक्टूबर को इसके अवदाब में बदलने की संभावना है. इसके बाद 25 अक्टूबर को यह गहरे अवदाब और 26 अक्टूबर की सुबह तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है. इसके बाद तूफान के आंध्र प्रदेश और उससे सटे दक्षिणी ओडिशा तट की ओर बढ़ने की संभावना जताई गई है.


28 अक्टूबर से बिहार में बारिश का दौर

चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से बिहार में पूर्वी हवाएं सक्रिय हो रही हैं. इन हवाओं के कारण वातावरण में नमी बढ़ रही है. मौसम विभाग के मुताबिक 28 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है.


29 अक्टूबर को कुछ इलाकों में भारी बारिश की भी प्रबल संभावना जताई गई है. बारिश के साथ कई जगहों पर मेघगर्जन, वज्रपात और तेज झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं. कुछ स्थानों पर हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की आशंका है.


पूर्णिया, गया समेत इन जिलों में भारी बारिश के आसार

चक्रवाती तूफान का असर बिहार के झारखंड और पश्चिम बंगाल से सटे इलाकों में ज्यादा देखने को मिल सकता है. मौसम विभाग ने सीमांचल और दक्षिण बिहार के कई जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना जताई है.


29 अक्टूबर को गया, कैमूर, औरंगाबाद, पूर्णिया और किशनगंज जिले तथा आसपास के इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है. इन इलाकों में बारिश के साथ वज्रपात और तेज हवा को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.


फसलों को भी हो सकता है नुकसान

मौसम विभाग ने बारिश और तेज हवा के कारण खड़ी फसलों और फलदार पेड़ों को नुकसान की आशंका जताई है. तेज हवा और खराब मौसम से झुग्गी-झोपड़ियों तथा कच्चे मकानों को भी नुकसान हो सकता है. वज्रपात की स्थिति में जन-धन और पशुधन की हानि का खतरा भी बना रहेगा.


मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ. आनंद शंकर ने किसानों को सलाह दी है कि खरीफ फसलों की कटाई का समय होने के कारण पकी हुई फसलों को जल्द काटकर सुरक्षित स्थान पर रख लें. खेतों में कटी हुई फसल और खुले स्थान पर सुखाने के लिए रखी गई फसल को बारिश से बचाने की व्यवस्था करें. जरूरत नहीं होने पर इस दौरान फसलों की कटाई को कुछ समय के लिए टालने की सलाह दी गई है. सब्जियों की फसलों में फिलहाल सिंचाई रोकने को भी कहा गया है.


मौसम खराब होने और वज्रपात की आशंका के दौरान लोगों को खुले मैदान में जाने से बचने की सलाह दी गई है. ऊंचे पेड़ों, जलाशयों और बिजली के खंभों के पास खड़े न रहें और संभव हो तो किसी पक्के भवन में शरण लें.


बिजली चमकने के दौरान मोबाइल फोन और विद्युत उपकरणों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है. खराब मौसम के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें और स्थानीय प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें.