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अब इन लोगों को इलाज के लिए नहीं जाना होगा रांची! हर जिले में जल्द शुरू होगा इस बीमारी का इलाज; सरकार ने लिया फैसला

Bihar News: बिहार सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के हर जिले के सदर अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में मानसिक रोगियों के लिए अलग वार्ड बनाए जाएंगे। इस फैसले से मरीजों को अपने ही जिले में बेहतर इलाज और पुन

24-Mar-2026 10:51 AM

By First Bihar

Bihar News: बिहार में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए अब राज्य सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। पहले मानसिक रोगियों को इलाज के लिए रांची जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता था, जिससे मरीज और उनके परिवार को काफी परेशानी होती थी। लेकिन अब इस झंझट से राहत मिलने वाली है, क्योंकि राज्य के हर जिले के सदर अस्पताल और सभी मेडिकल कॉलेजों में मानसिक रोगियों के लिए अलग से वार्ड बनाए जाएंगे।


स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों को बेहतर इलाज देने के साथ-साथ उनके पुनर्वास की भी पूरी व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और समाज कल्याण विभाग मिलकर काम करेंगे, ताकि मरीजों को इलाज के बाद सामान्य जीवन में वापस लाने में मदद मिल सके।


सरकार ने यह भी तय किया है कि सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में मनोचिकित्सकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी। जहां जरूरत होगी, वहां नए पद भी बनाए जाएंगे, ताकि मरीजों को समय पर सही इलाज मिल सके। अभी तक कई जगहों पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पाता था।


यह फैसला पटना उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद लिया गया है। अदालत ने मानसिक रोगियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा था, क्योंकि राज्य में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों और मेडिकल कॉलेजों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश जारी किए हैं।


विभाग की जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में करीब एक लाख लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के लिए अस्पतालों में परामर्श लिया है। यह आंकड़ा बताता है कि मानसिक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और अब इस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।


विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार मानसिक रोगियों को परिवार का पूरा सहयोग नहीं मिल पाता है। कुछ लोग उन्हें समझने के बजाय नजरअंदाज कर देते हैं या उनके साथ सही व्यवहार नहीं करते। इससे मरीज की स्थिति और खराब हो जाती है। ऐसे में जागरूकता बढ़ाना भी बहुत जरूरी है, ताकि लोग मानसिक बीमारियों को समझें और मरीजों का साथ दें।


मनोचिकित्सकों के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद मानसिक रोगियों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। उस समय लोग लंबे समय तक घरों में बंद रहे, जिससे अकेलापन बढ़ा। इसके अलावा लगातार टीवी और मोबाइल के इस्तेमाल, डर और अनिश्चितता ने भी लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाला। कई लोग तनाव, चिंता और अवसाद का शिकार हो गए।


आज के समय में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। इनमें अवसाद, एकाग्रता की कमी, अत्यधिक चिंता, डर, व्यवहार संबंधी विकार, डिमेंशिया, नशीले पदार्थों की लत और उन्माद जैसी स्थितियां शामिल हैं। अगर इनका समय पर इलाज नहीं किया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकती हैं।


सरकार का यह कदम मानसिक रोगियों के लिए काफी राहत भरा साबित हो सकता है। अब उन्हें इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों में जाने की जरूरत नहीं होगी। अपने ही जिले में बेहतर इलाज मिलने से समय, पैसे और परेशानी—तीनों की बचत होगी। साथ ही, पुनर्वास की सुविधा मिलने से मरीजों को समाज में दोबारा सामान्य जीवन जीने में मदद मिलेगी।