DESK : खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी, बचपन से हम झांसी वाली रानी की कहानी सुनते आ रहे हैं. लेकिन अब यह झांसी नाम सुनने को नहीं मिलेगा. दरअसल, यूपी सरकार ने अब झांसी रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के रेलवे के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी इस पर सहमती दे दी थी. अब आने वाले दिनों में झांसी स्टेशन को वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन नाम से जाना जाएगा.


बता दें कि स्टेशन का नाम बदलने के लिए भाजपा के राज्यसभा सांसद प्रभात झा सहित कई स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने कुछ वर्ष पहले झांसी में आयोजित रेलवे की बैठक में झांसी का नाम रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर किये जाने की मांग की थी. इस पर रेलवे ने हामी भरते हुये नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू की थी. अब गृह मंत्रालय व अब उत्तर प्रदेश  सरकार से भी इसकी मंजूरी मिल गई है. 


नाम बदलने का यह चलन नया नहीं है. इससे पहले भी यूपी सरकार कई रेलवे स्टेशनों के नाम बदल चुकी है. यूपी सरकार इलाहाबाद का नाम प्रयागराज, मुगलसराय स्टेशन का नाम दीन दयाल उपाध्याय और फैजाबाद का नाम अयोध्या कर चुकी है. नाम बदलने वाले स्टेशनों की लिस्ट में वाराणसी का मंडुआडीह स्टेशन भी है. मंडुआडीह स्टेशन का नाम बदलकर बनारस स्टेशन रखा गया है. इलाहाबाद जंक्शन का नाम भी बदल कर प्रयागराज जंक्शन कर दिया गया है. वहीं, नौगढ़ रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर सिद्धार्थनगर कर दिया  गया है.


कैसे बदला जाता है नाम


बता दें कि रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की प्रक्रिया में केंद्रीय गृह मंत्रालय की अहम भूमिका होती है. राज्य सरकार रेलवे स्टेशन का नाम बदलने का अनुरोध केंद्र सरकार को भेजती है है. केंद्र सरकार उक्त प्रस्ताव पर इंटेलिजेंस ब्यूरो, डाक विभाग, भारतीय भौगोलिक सर्वेक्षण विभाग, रेलवे मंत्रालय जैसे कई विभागों और एजेंसियों को भेज कर एनओसी मांगता है. विभागों और एजेंसियों से एनओसी मिलने के बाद गृह मंत्रालय नाम बदलने की मंजूरी देता है.