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21-Oct-2025 07:48 AM
By First Bihar
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में महागठबंधन के घटक दलों — राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस — के बीच कई सीटों पर सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। भले ही दोनों दल चुनाव पूर्व गठबंधन में हैं, लेकिन कई विधानसभा सीटों पर “फ्रेंडली फाइट” की स्थिति बन गई है। इन सीटों पर दोनों पार्टियों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
इन सीटों पर महागठबंधन के घटक दलों की सीधी टक्कर
सबसे पहले बात करें बछवाड़ा सीट की, जहां सीपीआई के अवधेश राय और कांग्रेस के गरीब दास मैदान में हैं। यहां वाम दल और कांग्रेस, दोनों महागठबंधन का हिस्सा हैं, इसलिए मतदाता के लिए चुनावी समीकरण जटिल नजर आ रहा है। चैनपुर सीट पर वीआईपी के गोविंद बिंद और राजद के बृज किशोर बिंद के बीच मुकाबला है। वीआईपी पहले एनडीए में थी, लेकिन इस बार उसने गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
नरकटियागंज में राजद के दीपक यादव और कांग्रेस के शाश्वत केदार पांडेय के बीच टक्कर है। यह सीट सीमांचल के चुनावी परिदृश्य में खास मानी जा रही है क्योंकि यहां जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दे दोनों प्रमुख हैं। वैशाली में भी यही स्थिति है। राजद के अजय कुशवाहा और कांग्रेस के ई. संजीव सिंह के बीच मुकाबला है। दोनों उम्मीदवार अपने-अपने समुदाय में लोकप्रिय माने जाते हैं। सुल्तानगंज सीट पर राजद के चंदन सिन्हा और कांग्रेस के ललन यादव के बीच सीधी फाइट है। वहीं कहलगांव में राजद के रजनीश भारती और कांग्रेस के प्रवीण सिंह कुशवाहा आमने-सामने हैं।
सिकंदरा विधानसभा सीट पर भी महागठबंधन के दो दिग्गजों के बीच टकराव है। राजद के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी और कांग्रेस के विनोद चौधरी। यह सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है और यहां मुकाबला काफी रोचक माना जा रहा है।
राजद ने कुछ जगह टकराव से बचने की कोशिश की
हालांकि, इन सीटों पर टकराव के बावजूद, राजद ने कांग्रेस से सीधी भिड़ंत से बचने की कोशिश भी की है। पार्टी ने बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार राम के खिलाफ कुटुंबा (आरक्षित) सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा। लेकिन दूसरी ओर वैशाली और कहलगांव में राजद प्रत्याशी मैदान में हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि महागठबंधन में सीट समन्वय की प्रक्रिया पूरी तरह संतुलित नहीं हो पाई है।
वीआईपी और राजद के बीच भी टकराव की स्थिति बनी थी
इससे पहले तारापुर सीट पर भी राजद और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के बीच टकराव की संभावना थी। यहां से पूर्व मंत्री मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी ने सकलदेव बिंद को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया। भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मैदान में आने के बाद वीआईपी उम्मीदवार ने बगावत करते हुए चौधरी की मौजूदगी में भाजपा ज्वाइन कर ली। इससे महागठबंधन और एनडीए दोनों में नई समीकरण बन गई है।
पहले चरण में कुल 1,314 उम्मीदवार मैदान में
निर्वाचन आयोग के अनुसार, पहले चरण में कुल 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं। 243 सदस्यीय विधानसभा की 121 सीटों पर 6 नवंबर को मतदान होना है। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान 300 से अधिक उम्मीदवारों के पर्चे खारिज कर दिए गए, जबकि 61 प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिए।
महागठबंधन के भीतर असंतोष और समीकरणों की चुनौती
राजद और कांग्रेस के बीच इन सीटों पर फ्रेंडली फाइट को लेकर कार्यकर्ताओं में असंतोष भी देखा जा रहा है। कई जगहों पर स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं में नाराजगी है कि गठबंधन धर्म निभाने के बजाय एक-दूसरे के खिलाफ प्रत्याशी खड़े किए गए हैं। हालांकि, दोनों पार्टियों के शीर्ष नेता इसे “लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा” बताते हुए चुनाव के बाद एकजुट होने की बात कह रहे हैं।
बिहार चुनाव 2025 के पहले चरण में जहां एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधी लड़ाई है, वहीं अंदरूनी मतभेदों ने महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इन सीटों पर “फ्रेंडली फाइट” का यह परिदृश्य बताता है कि बिहार की राजनीति में समीकरण लगातार बदल रहे हैं और अंतिम परिणाम तक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगी।