Anant Singh : "मैं अनंत कुमार सिंह शपथ लेता हूं कि...", जेल में बंद मोकामा के बाहुबली विधायक आज लेंगे ओथ; दुलारचंद हत्याकांड में नहीं मिली जमानत Girls Hostel : बिहार के एक और गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की रहस्यमयी मौत, बीपी मंडल कॉलेज में सिविल इंजीनियरिंग की पढाई कर रही छात्रा का शव बरामद Patna police raid : पटना में पांच ठिकानों पर रेड, 13 लड़कियां और एक युवक हिरासत में; जानिए क्या रही वजह Economic Survey 2025-26: बिहार में अमीरी-गरीबी की खाई उजागर, पटना सबसे अमीर तो जानिए सबसे गरीब कौन; आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट ने बताया पूरा सच NEET Student Death Case: नीट छात्रा की मौत के बाद टूटी नींद ! CBI जांच के बीच बिहार के सभी गर्ल्स हॉस्टलों की जांच के आदेश, DM-SP को लिखा गया लेटर Bihar Budget 2026 : बिहार का आम बजट 2026 आज, वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव करेंगे पेश; इन लोगों को मिल सकता है बड़ा फायदा Bihar weather : बिहार के 19 जिलों में घना कोहरा, छपरा में दृश्यता 50 मीटर से कम, बारिश का अलर्ट बिहार में अपराधियों का तांडव जारी: इंजीनियर की गोली मारकर हत्या, इलाके में सनसनी पटना: MLA फ्लैट में बिजली के कवर तार में आग लगने से मची अफरा-तफरी, विद्युत आपूर्ति ठप सहरसा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, लग्जरी कार से भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद, 4 तस्कर गिरफ्तार
19-Oct-2025 08:58 AM
By First Bihar
Bihar Assembly Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इस बार रिश्तों की राजनीति का जोर देखने को मिल रहा है। कई बड़े नेता पार्टी लाइन से पहले अपने परिवार के उम्मीदवारों को महत्व दे रहे हैं। कहीं पति-पत्नी के लिए वोट मांगने का नजारा दिख रहा है, तो कहीं साली और समधन भी प्रचार अभियान में जुटे हैं। टिकट वितरण में भी कई बार रिश्तेदारों को प्राथमिकता दी जा रही है। चुनावी रणनीति में पारिवारिक बंधन, जातिगत समीकरण और राजनीतिक हितों का मेल साफ दिखाई दे रहा है।
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख जीतन राम मांझी इस बार अपनी बहू, दामाद और समधन के लिए प्रचार कर रहे हैं। इमामगंज से उनकी बहू दीपा मांझी, बाराचट्टी से समधन ज्योति देवी उम्मीदवार हैं। वहीं, वर्तमान राज्य सरकार में मंत्री उनके बेटे संतोष कुमार सुमन भी पत्नी और सास के लिए वोट अपील कर रहे हैं। पिता-पुत्र की जोड़ी सिकंदरा में प्रचार अभियान में सक्रिय हैं।
दरभंगा के गौड़ाबौराम से भाजपा विधायक स्वर्णा सिंह के पति सुजीत कुमार को टिकट मिला है। इस सीट पर जातीय और धार्मिक समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या लगभग 17 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम मतदाता भी निर्णायक हो सकते हैं। स्वर्णा सिंह अपने पति के लिए वोट मांगेंगी और पिछले पांच साल में क्षेत्र में किए गए कार्यों का महत्व भी उजागर करेंगी।
सासाराम में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा अपनी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा के लिए प्रचार करेंगे। बेटे दीपक कुशवाहा को महुआ सीट में लाने की योजना थी, लेकिन गठबंधन संतुलन के कारण यह संभव नहीं हो पाया। अब पत्नी मैदान में हैं और बेटे का राजनीतिक करियर विधान परिषद के जरिए शुरू होगा।
समस्तीपुर के वारिसनगर में जदयू विधायक अशोक कुमार मुन्ना अपने बेटे डॉ. मांजरीक मृणाल के लिए वोट अपील करेंगे। मृणाल अमेरिका में विज्ञानी रह चुके हैं और राजनीतिक रूप से नए हैं। घोसी सीट पर भी पिता-पुत्र की जोड़ी प्रचार में सक्रिय होगी। जदयू ने अरुण कुमार के बेटे ऋतुराज कुमार को जहानाबाद की घोसी से उम्मीदवार बनाया है।
राजद भी रिश्तों के महत्व को पूरी तरह भुनाने में लगा है। रालोजपा के पूर्व केंद्रीय संसदीय बोर्ड अध्यक्ष सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को मोकामा से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, सारण के परसा से तेज प्रताप यादव की चचेरी साली करिश्मा यादव मैदान में हैं। पारिवारिक विवाद के बावजूद तेजस्वी यादव अपनी साली के लिए प्रचार करेंगे।
सिवान जिले की रघुनाथपुर विधानसभा सीट इस बार खास चर्चा में है। राजग गठबंधन ने जदयू के विकास कुमार सिंह उर्फ जीशु सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जबकि महागठबंधन में राजद ने दिवंगत पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन के पुत्र ओसामा शहाब को मैदान में उतारा है। जनसुराज ने पहली बार उम्मीदवार राहुल कीर्ति सिंह को मैदान में उतारा है। रघुनाथपुर इस बार हॉट सीट बन गई है, क्योंकि राजद ने वर्तमान विधायक हरिशंकर यादव का टिकट काटकर ओसामा शहाब को उतारा है।
ओसामा शहाब ने चुनाव से पहले अपनी मां हेना शहाब के साथ राजद की पुनः सदस्यता ली और पार्टी के सिंबल पर नामांकन कर दिया। यह सीट उनके लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जा रही है। जदयू के नए उम्मीदवार जीशु सिंह को चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि पिछली बार नए चेहरे पर दांव उल्टा पड़ा था।
राजद के एमवाई समीकरण की परख इस चुनाव में होगी। जनसुराज इस बार बदलाव के उद्देश्य को लेकर पहली बार अपने उम्मीदवारों को जनता के बीच उतार रही है। इस चुनाव में परिवार, रिश्तेदारी और राजनीतिक रणनीति का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलेगा। जनता अब तय करेगी कि क्या रिश्तों की राजनीति को स्वीकार करती है और इसका असर अंतिम चुनाव परिणाम पर कितना होगा।