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Bihar Election 2025: महागठबंधन में सीटों का बंटवारा अटका, क्यों कांग्रेस-राजद में नहीं बन रही सहमति?

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के नामांकन वापसी की समय सीमा अब बहुत करीब है, लेकिन महागठबंधन के भीतर सीटों को लेकर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है।

Bihar Election 2025

20-Oct-2025 07:17 AM

By First Bihar

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के नामांकन वापसी की समय सीमा अब बहुत करीब है, लेकिन महागठबंधन के भीतर सीटों को लेकर मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस और राजद, जो गठबंधन के दो मुख्य घटक हैं, सीटों की रस्साकशी में किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। दोनों दलों के बीच चल रही बातचीत का अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। चुनावी समय नजदीक आने के बावजूद इस मतभेद ने महागठबंधन के भीतर बेचैनी बढ़ा दी है, क्योंकि कई सीटों पर दोनों दलों के उम्मीदवार आमने-सामने चुनाव मैदान में उतर चुके हैं, जिससे दोस्ताना मुकाबले जैसी स्थिति बन गई है।


जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस और राजद के रणनीतिकारों के बीच रविवार को भी फोन पर बातचीत हुई, जिसमें एक-दूसरे के खिलाफ खड़े किए गए उम्मीदवारों को वापस लेने पर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाया। सोमवार को नामांकन वापसी की अंतिम तारीख है, और अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि महागठबंधन सीट बंटवारे के इस विवाद को सुलझा पाएगा या नहीं। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी उन सीटों पर पीछे नहीं हटेगी, जहां उसे अपने आधार का भरोसा है। वहीं, राजद का रुख अब तक कठोर बना हुआ है।


सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने राजद नेता तेजस्वी यादव को यह संदेश भेजा है कि यदि सीटों को लेकर समझौता नहीं हुआ तो गठबंधन की एकजुटता की छवि को नुकसान हो सकता है। हालांकि, तेजस्वी यादव ने अब तक कोई लचीलापन नहीं दिखाया है, जिससे स्थिति और जटिल होती जा रही है। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से भी अब तक लालू प्रसाद यादव या तेजस्वी यादव से सीधे संवाद की कोई पहल नहीं की गई है।


सीट बंटवारे को लेकर गतिरोध सुलझाने के उद्देश्य से पिछले सप्ताह तेजस्वी यादव दिल्ली पहुंचे थे, जहां उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की थी। बैठक के बाद यह दावा किया गया था कि सीटों का मामला लगभग सुलझा लिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। कई सीटों पर अब भी दोनों दलों के उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर तय मानी जा रही है। इस बीच बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने अपने पार्टी नेताओं को इस संभावित “दोस्ताना मुकाबले” के लिए तैयार रहने का संदेश देना शुरू कर दिया है।


हालांकि, बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार झा ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों के गठबंधन अनुभव बताते हैं कि दोस्ताना मुकाबले का परिणाम कभी भी कांग्रेस या महागठबंधन के पक्ष में नहीं रहा है। उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव और 2005 के विधानसभा चुनाव के उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे प्रयोगों से कांग्रेस को सीमित सफलता मिली थी और महागठबंधन की स्थिति कमजोर हुई थी। झा का मानना है कि राहुल गांधी ने जिस जोश और एकता के साथ महागठबंधन का चुनावी अभियान शुरू किया है, उसे कमजोर करने वाली किसी भी स्थिति से बचना जरूरी है।


माना जा रहा है कि सीटों को लेकर जारी यह खींचतान महागठबंधन के लिए आगामी चुनाव में नुकसानदेह साबित हो सकती है। यदि दोनों दल आपसी मतभेदों को दूर नहीं करते, तो एनडीए को इसका सीधा फायदा मिल सकता है। बिहार के मतदाता पारंपरिक रूप से गठबंधन की एकजुटता को गंभीरता से लेते हैं, और ऐसे में आंतरिक मतभेद चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।