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22-Oct-2025 12:27 PM
By First Bihar
Bihar Assembly Election 2025 : बिहार में विधानसभा चुनाव का माहौल अब पूरी तरह गरम हो चुका है। हर तरफ नेताओं के चुनावी वादों और बयानबाज़ियों का शोर सुनाई दे रहा है। इस बार का चुनावी रणक्षेत्र पहले से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धात्मक और रणनीतिक दिखाई दे रहा है। सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं।
विपक्ष के नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव लगातार जनता को अपने बड़े चुनावी वादों के माध्यम से लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनकी सरकार बनने पर बिहार में सरकारी नौकरियों की संख्या बढ़ाई जाएगी और वर्तमान संविदा कर्मचारियों को स्थायी सरकारी कर्मचारी बनाने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। यह वादे खासतौर पर युवा वर्ग और नौकरी की तलाश में लगे लोगों के लिए बहुत आकर्षक माने जा रहे हैं।
तेजस्वी यादव के इस ऐलान के बाद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चिराग पासवान ने मीडिया के सामने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। चिराग पासवान ने कहा कि पहले महागठबंधन के अंदर आपसी झगड़े और असहमति को सुलझाना ज़रूरी है, उसके बाद ही ऐसे बड़े वादों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने तेजस्वी यादव पर तंज कसा कि सत्ता में आने से पहले ही वह ऐसे सपने देखने लगे हैं, जिन्हें उन्होंने 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' बताया।
चिराग पासवान ने आगे कहा कि इन नेताओं को चुनावी प्रचार शुरू करने की असल गंभीरता का एहसास होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि इतने दिनों तक मीडिया और जनता से दूरी क्यों बनाई गई। वह बोले कि तेजस्वी यादव और राहुल गांधी जैसे नेता पहले बिहार में सक्रिय क्यों नहीं थे। चिराग पासवान ने महागठबंधन की कार्यप्रणाली पर भी कटाक्ष किया और कहा कि पांचों घटक दल एक साथ नहीं लड़ सकते तो बिहार के विकास की बात कैसे करेंगे। उनके अनुसार, महागठबंधन पहले ही खत्म हो चुका है और अब यह केवल आंतरिक टकराव का मैदान बन गया है।
जलेबी छाने वाले मामले पर इशारा करते हुए चिराग पासवान ने चेतावनी दी कि जो स्थिति हरियाणा में बनी, वही हाल बिहार में देखने को मिल सकता है। उनका कहना था कि सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य का प्रशासनिक और विकास कार्य सुचारू रूप से चल रहा है और जनता को उनकी कार्यशैली पर कोई आपत्ति नहीं है।
चिराग पासवान ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि कई विपक्षी नेता अब भी AC कमरे में बैठकर अपनी महत्वाकांक्षाओं को समझने में लगे हुए हैं और चुनावी मैदान में उतरे बिना ही बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी नेता में नेतृत्व का हौसला और साहस नहीं है, तो जनता और संगठन किसे भरोसा करे। उन्होंने विशेष रूप से प्रशांत किशोर के बारे में टिप्पणी की कि उनके फैसले कुछ हद तक समर्थक कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ सकते हैं।
चिराग पासवान की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि बिहार में सत्तारूढ़ दल और विपक्षी गठबंधन दोनों ही अपने-अपने रणनीतिक कदमों से जनता को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि तेजस्वी यादव युवाओं को सरकारी नौकरी और संविदा कर्मचारियों के स्थायीकरण जैसे वादों से लुभाने की रणनीति अपनाए हुए हैं, वहीं चिराग पासवान और उनके समर्थक वास्तविकता और संगठनात्मक अनुशासन पर जोर दे रहे हैं।