Bihar Crime News: बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद अवैध शराब की तस्करी के मामले सामने आ रहे हैं। तस्कर दूसरे राज्यों से शराब बिहार पहुंचाने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। इसी क्रम में कैमूर जिले के मोहनिया चेकपोस्ट पर उत्पाद विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए एक मिनी कंटेनर ट्रक से भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की है।
चेकिंग के दौरान टीम ने संदिग्ध मिनी कंटेनर ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली। कंटेनर के अंदर शराब की पेटियां छिपाकर रखी गई थीं। तलाशी में कुल 592 पेटियों में 5,310 लीटर अवैध शराब बरामद हुई। बरामद शराब की अनुमानित बाजार कीमत करीब 80 लाख रुपये बताई जा रही है।
कार्रवाई के दौरान कंटेनर चालक को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान हरियाणा के चरखी दादरी जिले के चरखी गांव निवासी 28 वर्षीय अक्षय कुमार, पिता मनेश के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि शराब की खेप चंडीगढ़ से लोड की गई थी और इसे बिहार के सुपौल पहुंचाया जाना था।
उत्पाद विभाग के चेकपोस्ट प्रभारी संतोष श्रीवास्तव के अनुसार, टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि कंटेनर के जरिए शराब की बड़ी खेप बिहार लाई जा सकती है। सूचना के सत्यापन के बाद टीम ने वाहन को रोका और उसकी जांच की। तलाशी के दौरान शराब की बड़ी खेप बरामद हुई। अब जांच का दायरा गिरफ्तार चालक तक सीमित नहीं है। उत्पाद विभाग और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शराब की खेप बिहार में किस व्यक्ति या गिरोह तक पहुंचाई जानी थी।
चंडीगढ़ से शराब लोड कराने वाले, परिवहन की व्यवस्था करने वाले और सुपौल में खेप प्राप्त करने वाले लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब की तस्करी के पीछे संगठित नेटवर्क हो सकता है। इसी को देखते हुए गिरफ्तार आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है। उसके मोबाइल फोन, संपर्कों और शराब की खेप से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
उत्पाद विभाग के अनुसार, बिहार में शराबबंदी को प्रभावी बनाए रखने के लिए सीमावर्ती इलाकों, चेकपोस्ट और राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों की लगातार जांच की जा रही है। दूसरे राज्यों से बिहार में प्रवेश करने वाले संदिग्ध वाहनों पर विशेष नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शराब तस्करी को रोकने के लिए निगरानी और जांच अभियान जारी रहेगा। वहीं, बड़ी खेप की बरामदगी के बाद अब पुलिस और उत्पाद विभाग की जांच इस बात पर केंद्रित है कि इसके पीछे कौन-कौन लोग और नेटवर्क शामिल हैं।