DESK: खुद को IAS अधिकारी बता लोगों से कथित ठगी करने वाली 30 वर्षीय तृप्ति सिंह राजपूत को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, तृप्ति खुद को मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की एडिशनल डायरेक्टर और ट्रेनी IAS अधिकारी बताकर लोगों को सरकारी नौकरी और बिजनेस लीज दिलाने का झांसा देती थी। उसके खिलाफ भोपाल और अशोकनगर में तीन अलग-अलग FIR दर्ज हैं। मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का है। 


विधानसभा के एक रील से खुल गया भेद

मामले का खुलासा सोशल मीडिया पर वायरल एक रील के बाद हुआ। वायरल वीडियो में तृप्ति सिंह राजपूत दो अन्य महिलाओं के साथ दिखाई दे रही थी। वीडियो में वह दावा करती नजर आई कि वे मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंची हैं और अंदर फोटोग्राफी की अनुमति नहीं होने के कारण बाहर से वीडियो बना रही हैं।


पुलिस ने जब वीडियो की जांच की तो पता चला कि जिस जगह को विधानसभा बताया जा रहा था, वह वास्तव में मानव संग्रहालय की एक गैलरी थी। पुलिस ने वीडियो में दिखाई दे रही दोनों महिलाओं से पूछताछ की। तब पता चला कि तृप्ति ने उन्हें IAS अधिकारी होने का एक्टिंग करने के लिए कहा था और कथित तौर पर उनसे भी पैसे लिए थे।


नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लेने का आरोप

पुलिस ने बताया कि अप्रैल 2025 में तृप्ति अपने भाई सुधांशु सिंह के साथ चंदेरी के ‘किला कोठी’ टूरिज्म होटल में ठहरी थी। आरोप है कि वहां उसने चार स्थानीय युवकों को HRD मंत्रालय में नौकरी दिलाने का झांसा दिया था और उनसे 9.80 लाख रुपये कैश और मूल दस्तावेज भी लिये थे। पुलिस का कहना है कि तृप्ति ने अन्य लोगों को सरकारी नौकरी और बिजनेस लीज दिलाने के नाम पर भी ठगी की। एक मामले में तीन लाख रुपये लेने की बात भी सामने आई है।


तृप्ति ने पति को भी नहीं छोड़ा, खुद को IAS अफसर बताकर की शादी

इस मामले में तृप्ति के पति का बयान सामने आया है। पति ने पुलिस को बताया कि तृप्ति ने खुद को IAS अधिकारी बताकर उससे शादी की थी। फिलहाल दोनों के बीच घरेलू विवाद चल रहा है।


घर से मिला फर्जी दस्तावेजों का जखीरा

पुलिस ने तृप्ति की गिरफ्तारी के बाद भोपाल स्थित उसके घर की तलाशी ली। इस दौरान एक Toyota Innova कार पर ‘Government of India’ लिखी पट्टी, ट्रेनी IAS अधिकारी के नाम से कथित फर्जी लेटरहेड, आईडी कार्ड, जॉइनिंग लेटर और अन्य सामग्री बरामद होने की बात कही गई है।


पुलिस को घर से एक कथित फर्जी CBI आइडेंटिटी कार्ड भी मिला है। इसके अलावा लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA), मसूरी जैसे स्थानों के बैकग्राउंड वाली तस्वीरें भी मिली हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इनमें से कुछ दस्तावेज या पहचान पत्र AI की मदद से तैयार किए गए थे या नहीं।


फर्जी दस्तावेज बनाने वाले नेटवर्क की तलाश

अशोकनगर एसपी राजीव कुमार मिश्रा के मुताबिक, पुलिस ने उन दो लोगों की पहचान भी की है, जो कथित तौर पर तृप्ति को फर्जी सरकारी दस्तावेज और स्टांप तैयार करके उपलब्ध कराते थे।


तृप्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत धोखाधड़ी, छद्म वेश धारण करने, आपराधिक साजिश और साक्ष्य मिटाने समेत अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस उसके लैपटॉप, डिलीट किए गए डेटा और बैंक खातों की फॉरेंसिक जांच कर कथित पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।