बिहार के सहरसा से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। यहां बिहार सरकार के प्लेस ऑफ सेफ्टी  में कैद एक बाल कैदी ने बड़ा ही खौफनाक कदम उठा लिया। इस घटना के बाद पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। फिलहाल पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है और हर पहलू की जांच में जुट गई है।


जानकारी के मुताबिक, सदर थाना क्षेत्र के पुलिस लाइन स्थित विधि-विरुद्ध बालकों को निरुद्ध करने के बाद रखने के लिए बनाए गए बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित प्लेस ऑफ सेफ्टी में एक बाल कैदी का शव फंदे से लटका हुआ मिला। वहीं, मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उसकी बेरहमी से पिटाई कर हत्या की गई है।


बताया जा रहा है कि मृत बाल कैदी मधुबनी जिले का रहने वाला था। मामला तब सामने आया जब प्लेस ऑफ सेफ्टी के शौचालय में उसका शव गमछे से लटकता पाया गया। सूचना मिलते ही मौके पर तैनात अधिकारी और सुरक्षाकर्मी पहुंचे और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी। आदेश पर मुख्यालय डीएसपी टू कमलेश्वर प्रसाद सिंह मौके पर पहुंचे और पूरी जानकारी ली।


घटना स्थल पर सदर थानाध्यक्ष सुबोध कुमार, एफएसएल की टीम और डीआईयू के पुलिस अधिकारी भी पहुंचे और जांच शुरू कर दी। मृतक के पिता ने प्लेस ऑफ सेफ्टी  की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पुत्र की हत्या की गई है। उन्होंने बताया कि उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया था जिसमें कहा गया कि उनका पुत्र शौचालय गया था और उसने गमछे से फांसी लगा ली है। जबकि उनका पुत्र मधुबनी जिले में टायर चोरी मामले में प्लेस ऑफ सेफ्टी दरभंगा में बंद था।


बाद में, एक अन्य बाल कैदी की मौत के मामले में उसे भी नामजद किया गया और फिर पर्यवेक्षण गृह मुजफ्फरपुर भेजा गया था। लगभग दो महीने पहले उसे सहरसा स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी में शिफ्ट किया गया था। सोमवार को पिता ने उससे फोन पर बात भी की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चे के शरीर पर कई जख्म के निशान हैं और पूरा शरीर लाल पड़ा है, जिसे देखकर साफ लगता है कि उसकी बेरहमी से पिटाई कर हत्या की गई है।


इस मामले पर डीएसपी टू कमलेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि प्लेस ऑफ सेफ्टी एक सुरक्षित स्थान है। वहां एक विधि-विवादित किशोर की मौत की सूचना मिली है। जांच के बिना कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। मामले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही सच सामने आएगा।


सदर अस्पताल में डीएसपी ने बताया कि परिजनों द्वारा हत्या का आरोप लगाया गया है। इसको लेकर पोस्टमार्टम के लिए तीन डॉक्टरों का बोर्ड गठित किया गया है, जिसमें एक मजिस्ट्रेट भी तैनात हैं। मजिस्ट्रेट के रूप में अनुमंडल कार्यपालक दंडाधिकारी को नियुक्त किया गया है। पूरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।