Valentine Day: पटना में वैलेंटाइन डे से पहले 'बाबू-सोना' पोस्टर, पुलिस और जिला प्रशासन अलर्ट; बढ़ाई गई निगरानी Valentine Day: पटना में वैलेंटाइन डे से पहले 'बाबू-सोना' पोस्टर, पुलिस और जिला प्रशासन अलर्ट; बढ़ाई गई निगरानी PMJAY 2026 : आयुष्मान कार्ड बनवाना हुआ आसान,अब आशा और आंगनवाड़ी सहायिका भी कर सकेंगी यह काम पटना से बड़ी खबर: सांसद पप्पू यादव को तीनों मामलों में मिली जमानत, किसी भी वक्त जेल से निकलेंगे बाहर Bihar Crime News: पटना के बाद बक्सर और पूर्णिया कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी Bihar Crime News: पटना के बाद बक्सर और पूर्णिया कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी वैलेंटाइन वीक में प्रेमिका के घर फायरिंग: सनकी प्रेमी सहित 3 आरोपियों को पुलिस ने दबोचा, देसी पिस्टल और कारतूस बरामद New PMO India : बदल गया भारत का प्रशासनिक पावर सेंटर, प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सेवा तीर्थ’ PMO का उद्घाटन किया Bihar News: स्वास्थ्य सुधार की दिशा में बड़ी पहल, बिहार सरकार और गेट्स फाउंडेशन के बीच MoU पर हस्ताक्षर; हेल्थ केयर में आएगी नई क्रांति Bihar News: स्वास्थ्य सुधार की दिशा में बड़ी पहल, बिहार सरकार और गेट्स फाउंडेशन के बीच MoU पर हस्ताक्षर; हेल्थ केयर में आएगी नई क्रांति
13-Feb-2026 11:46 AM
By First Bihar
Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधानसभा में आज अनुश्रवण समिति की बैठक नहीं होने को लेकर सदन में जोरदार गहमागहमी देखने को मिली। प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी हुई। इस मामले को उठाते हुए विधायक अख्तरूल इमाम ने सरकार से सवाल किया कि अनुमंडल स्तर पर अनुश्रवण समिति के गठन का निर्णय सरकार द्वारा पहले ही लिया जा चुका था, लेकिन पिछले पांच वर्षों में इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
अख्तरूल इमाम ने सदन में कहा कि अनुश्रवण समिति का उद्देश्य सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करना होता है ताकि आम जनता को योजनाओं का लाभ सही तरीके से मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुमंडल स्तर पर समिति का गठन नहीं होने के कारण कई योजनाओं की सही निगरानी नहीं हो पा रही है। उन्होंने बताया कि जब इस संबंध में एसडीओ से सवाल किया गया तो उन्होंने एक बार बैठक बुलाने की बात कही थी, लेकिन उसके बाद समिति की कोई बैठक नहीं हुई और पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
इस पर जवाब देते हुए विभागीय मंत्री ने कहा कि अगर इस तरह की समस्या पिछले पांच वर्षों से थी तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि अब जाकर विपक्ष की नींद टूटी है। हालांकि मंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही सभी अनुमंडलों में अनुश्रवण समितियों का गठन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर निर्देश जारी किए जाएंगे ताकि समितियां नियमित रूप से काम कर सकें और उनकी बैठकें समय-समय पर आयोजित की जा सकें।
इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के विधायक प्रमोद कुमार ने भी सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि यह बात सही है कि कई स्थानों पर समितियां बनाई तो गई थीं, लेकिन वे प्रभावी रूप से काम नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा कि समितियों की निष्क्रियता के कारण प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ रही है, जिसे मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि समिति के गठन के साथ-साथ उसकी कार्यप्रणाली को भी प्रभावी बनाया जाए।
सदन में इस मुद्दे को लेकर कुछ समय तक शोर-शराबा और बहस जारी रही। विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने भरोसा दिलाया कि जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हर स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत हो और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बिहार विधानसभा में माहौल काफी गर्म रहा। हालांकि बाद में सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई, लेकिन यह मुद्दा राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार अपने आश्वासन को कितनी जल्दी जमीन पर उतारती है और अनुमंडल स्तर पर अनुश्रवण समितियों का गठन कब तक पूरा किया जाता है।