Bihar News: बिहार के लोगों को जल्द ही लो वोल्टेज की समस्या से राहत मिल सकती है। राज्य में बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पुराने और जर्जर तारों, बिजली के पोल और खपत के भार के अनुरूप ट्रांसफार्मरों को बदला जाएगा। इस योजना से जर्जर तार टूटकर गिरने, ट्रांसफार्मर जलने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है। इससे राज्य के करीब सवा दो करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को लाभ मिल सकता है।
उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए ऊर्जा विभाग ने करीब 12 हजार करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। इसे जल्द ही स्वीकृति के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। योजना को लागू करने के लिए ऊर्जा विभाग बैंकों से कर्ज लेने की तैयारी कर रहा है।
ऊर्जा विभाग को लगातार जर्जर तार और बिजली के पोल गिरने के साथ ट्रांसफार्मर जलने की शिकायतें मिल रही थीं। विभागीय समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने अधिकारियों को इस समस्या के समाधान के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा था।
पिछले एक दशक में, वर्ष 2015-16 के बाद से राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या दोगुनी से भी अधिक बढ़ी है। इसके कारण बिजली के तारों और ट्रांसफार्मरों पर लोड बढ़ा है। इसे देखते हुए कम क्षमता वाले तारों को उच्च क्षमता वाले तारों से बदला जाएगा और बिजली की खपत के अनुरूप ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे।
ऊर्जा विशेषज्ञ एसके सिंह के अनुसार, अब ग्रामीण इलाकों में भी घरों में एसी और कूलर जैसे बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे तारों और ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। ऐसे में जर्जर तारों को बदलने के साथ उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाने की जरूरत है। इसके अलावा पावर सबस्टेशन और ग्रिड की संख्या बढ़ाना भी जरूरी है।
किस मद में कितना होगा खर्च?
पोल और केबल के तार: 1.18 लाख किलोमीटर के लिए 8,465 करोड़ रुपये।
बांस-बल्ले पर लगे तार: 33,698 किलोमीटर के लिए 2,262 करोड़ रुपये।
ट्रांसफार्मर: 12 हजार ट्रांसफार्मर लगाने या बदलने के लिए 370 करोड़ रुपये।
उत्तर और दक्षिण बिहार में इस तरह खर्च होगी राशि
उत्तर बिहार ऊर्जा वितरण कंपनी: 21 जिलों में 6,066 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
दक्षिण बिहार ऊर्जा वितरण कंपनी: 17 जिलों में 5,031 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
बिजली उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?
इस योजना के लागू होने से बिजली व्यवस्था में सुधार आने की उम्मीद है। उपभोक्ताओं को कम वोल्टेज की समस्या से राहत मिलने के साथ बिजली आपूर्ति अधिक सुचारु हो सकती है। जर्जर तारों और पुराने उपकरणों को बदलने से बिजली संबंधी दुर्घटनाओं में कमी आएगी। साथ ही बिजली की बर्बादी कम होगी और ट्रांसफार्मर जलने की समस्या पर भी अंकुश लग सकता है। हालांकि, योजना का वास्तविक लाभ इसके कैबिनेट से मंजूर होने और धरातल पर लागू होने के बाद ही सामने आएगा।