मुजफ्फरपुर में हजरत दाता कंबल शाह का 144वां उर्स: पुलिस की चादर जुलूस, अमन-चैन की मांगी दुआ आरा में बाइक मैकेनिक की गोली मारकर हत्या, इलाके में सनसनी जन सुराज को फिर से खड़ा करने में जुटे प्रशांत किशोर, 15 नए प्रदेश महासचिव की लिस्ट जारी छपरा पहुंचे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, बोले..जन समस्याओं का होगा त्वरित समाधान बिहार में 6 अप्रैल से स्कूल का नया टाइमटेबल: 7 बजे से पहले बजेगी घंटी चंडीगढ़ में भाजपा कार्यालय के बाहर ब्लास्ट से हड़कंप, जांच में जुटीं पुलिस करप्शन किंग SDPO को हटाया गया: PHQ ने वापस बुलाया, EOU की रेड में करीब 80 करोड़ की संपत्ति का खुलासा टेंट हाउस के मालिक पर नाबालिग के साथ अश्लील हरकत करने का आरोप, आक्रोशित लोगों ने घर के बाहर किया हंगामा पटना में अगलगी की दो घटना: एंबुलेंस में लगी आग, AC फटने से नर्सिंग होम में मची अफरा-तफरी बिहार के इस जिले में नई चीनी मिल...100 एकड़ भूमि चिन्हित, गन्ना उद्योग विभाग के ACS ने जमीन का किया निरीक्षण
01-Apr-2026 10:47 PM
By First Bihar
MUZAFFARPUR: मुजफ्फरपुर में बुधवार को हजरत दाता कंबल शाह रहमतुल्लाह अलैह का 144वां सालाना उर्स पूरे श्रद्धा और अकीदत के साथ मनाया गया। इस अवसर पर टाउन थाना की ओर से पारंपरिक गाजे-बाजे के साथ भव्य चादर जुलूस निकाला गया, जिसमें पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हुए।
टाउन थाना से निकला पारंपरिक चादर जुलूस
कार्यक्रम की शुरुआत टाउन थाना परिसर में चादर को फातिहा देकर की गई। इसके बाद जुलूस मोतीझील और कल्याणी होते हुए मजार शरीफ तक पहुंचा। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है, जिसमें हर वर्ष पुलिस प्रशासन की ओर से चादरपोशी की जाती है।
अकीदतमंदों की उमड़ी भीड़, दिनभर चला धार्मिक कार्यक्रम
मजार शरीफ पर सुबह से ही कुरानखानी और फातिहाखानी का सिलसिला चलता रहा। दूर-दराज से पहुंचे अकीदतमंदों ने चादरपोशी कर दुआएं मांगी। पूरे इलाके में आध्यात्मिक माहौल बना रहा।
पुलिस अधिकारियों ने की शांति की कामना
इस मौके पर ग्रामीण एसपी, सिटी एसपी और टाउन डीएसपी समेत कई पुलिस पदाधिकारी मौजूद रहे। सिटी एसपी ने कहा कि यह चादर जुलूस मुजफ्फरपुर में अमन-चैन और भाईचारे की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से निकाला जाता है। उन्होंने परवरदिगार से शहर और देश में शांति व सद्भाव बनाए रखने की दुआ मांगी।
पुरानी परंपरा का निर्वहन
पुलिस प्रशासन द्वारा उर्स के मौके पर चादर चढ़ाने की यह परंपरा वर्षों पुरानी है, जिसे आज भी पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है।