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Bihar Assembly : बिहार विधानसभा में प्रवासी मजदूरों को लेकर हुआ हंगामा, अख्तरुल ईमान की मांग पर सरकार ने दिया बड़ा बयान

बिहार विधानसभा में AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने प्रवासी मजदूरों की दुर्घटना में मौत होने पर शव को सरकारी खर्च पर घर लाने की मांग उठाई। मंत्री संजय टाइगर के जवाब पर विपक्ष ने हंगामा किया, जबकि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भविष्य में विचार करने का आश्

18-Feb-2026 11:45 AM

By First Bihar

Bihar Assembly :  बिहार विधानसभा में प्रवासी श्रमिकों के मुद्दे पर उस वक्त जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने असंगठित क्षेत्र के प्रवासी मजदूरों की दुर्घटना में मौत होने पर उनके पार्थिव शरीर को सरकार के खर्च पर पैतृक गांव तक पहुंचाने की मांग उठाई। यह मामला जैसे ही सदन में उठा, पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।


दरअसल, सदन की कार्यवाही के दौरान अख्तरुल ईमान ने कहा कि बिहार के हजारों मजदूर रोजगार की तलाश में राज्य से बाहर या विदेशों तक जाते हैं। वहां काम करने के दौरान कई बार दुर्घटनाएं हो जाती हैं, जिसमें मजदूरों की मौत हो जाती है। ऐसी स्थिति में गरीब परिवारों के सामने सबसे बड़ी समस्या मृतक मजदूर के पार्थिव शरीर को अपने गांव तक लाने की होती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों में सरकार को जिम्मेदारी लेते हुए मजदूरों के शव को उनके पैतृक आवास तक पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए।


इस पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री संजय टाइगर ने कहा कि विभागीय स्तर पर स्वाभाविक मौत के मामलों में पार्थिव शरीर को पैतृक आवास तक पहुंचाने का कोई प्रावधान नहीं है। मंत्री के इस जवाब के बाद विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामा शुरू हो गया।


अख्तरुल ईमान ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अगर चाहे तो इस दिशा में नया प्रावधान बना सकती है। उन्होंने कहा कि गरीब मजदूरों के परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर होते हैं और शव को घर तक लाने में लाखों रुपये तक खर्च हो जाता है। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जरूरत पड़े तो विधायकों की सैलरी रोक दी जाए, लेकिन मजदूरों के पार्थिव शरीर को उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।


इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायकों ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार चुनाव के समय मजदूरों को लाने के लिए ट्रेन और अन्य व्यवस्थाएं करती है, लेकिन जब मजदूरों की मौत हो जाती है तो उनके शव को घर पहुंचाने की व्यवस्था नहीं की जाती। राजद विधायकों ने इसे सरकार की संवेदनहीनता बताते हुए तत्काल नीति बनाने की मांग की।


सदन में बढ़ते विवाद और हंगामे को देखते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा उठाया गया मुद्दा गंभीर है और सरकार इस पर भविष्य में विचार करेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार प्रवासी मजदूरों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर संभावनाओं की जांच कराएगी।


इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बिहार विधानसभा का माहौल काफी गरम रहा। विपक्ष ने मजदूरों के हितों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश की, जबकि सरकार ने नियमों और प्रावधानों का हवाला देते हुए फिलहाल किसी ठोस घोषणा से परहेज किया। हालांकि उपमुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ सकी, लेकिन यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से और गरमा सकता है।