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Bihar News : 'हुजुर यह सरकार के सामर्थ का हनन है ....', मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों की बात नहीं मान रहे अधिकारी, BJP विधायक ने सरकार पर उठाया सवाल; नियमावली लेकर पहुंचे सदन

जीवेश कुमार ने बिहार विधानसभा में बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार के अधिकारी मुख्यमंत्री और मंत्रियों के आदेशों को नजरअंदाज कर देते हैं। सदन में विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठा।

18-Feb-2026 12:12 PM

By First Bihar

Bihar News : बिहार की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब जीवेश कुमार ने बिहार विधानसभा में अपनी ही सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सदन में यह आरोप लगाया कि राज्य के अधिकारी कई बार मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों द्वारा दिए गए निर्देशों और आश्वासनों को भी नजरअंदाज कर देते हैं या उन्हें पलट देते हैं। उनका यह बयान न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और सदन की गरिमा से भी जुड़ा हुआ मुद्दा बन जाता है।


जीवेश कुमार ने सदन में स्पष्ट रूप से कहा कि यदि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री या मंत्री सदन में कोई आश्वासन देते हैं तो उसे लागू करना अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है। लेकिन यदि अधिकारी ही उन आदेशों को बदलने या अनदेखा करने लगें तो इससे सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर सदन के अंदर दिए गए आश्वासन और आदेशों का पालन नहीं होगा तो सदन चलाने का औचित्य ही समाप्त हो जाएगा। यह टिप्पणी विधायिका और कार्यपालिका के बीच संतुलन और जिम्मेदारी के सवाल को भी सामने लाती है। उन्होंने कहा कि यह सरकार के सामर्थ का हनन है। 


उन्होंने इस मुद्दे को राजकीय आश्वासन समिति से जोड़ते हुए नियम 250 का हवाला दिया। इस नियम के तहत समिति का दायित्व होता है कि वह मंत्रियों द्वारा सदन में दिए गए आश्वासनों, प्रतिज्ञाओं और वचनों की जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि उन्हें तय समय सीमा के भीतर लागू किया गया है या नहीं। यदि इन आश्वासनों को लागू नहीं किया गया है तो समिति संबंधित विभागों से जवाब मांग सकती है। जीवेश कुमार का कहना था कि इस नियम का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना है कि सरकार द्वारा सदन में किए गए वादे केवल औपचारिकता बनकर न रह जाएं, बल्कि उनका वास्तविक क्रियान्वयन भी हो।


विधायक ने इस पूरे मामले को सदन के विशेषाधिकार से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि जब मंत्री सदन में कोई उत्तर या आश्वासन देते हैं, तो वह सदन की आधिकारिक कार्यवाही का हिस्सा होता है। ऐसे में यदि कोई अधिकारी या अधिकारियों का समूह उस आश्वासन को पलट देता है तो यह सीधे तौर पर सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन माना जा सकता है। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा को चुनौती देने जैसा है।


इस मुद्दे ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की नीतियों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राजनीतिक नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। यदि दोनों के बीच तालमेल की कमी होगी तो इसका असर आम जनता तक पहुंचने वाली योजनाओं और फैसलों पर पड़ेगा। साथ ही, इससे जनता का भरोसा भी कमजोर हो सकता है।


जीवेश कुमार की मांग है कि इस मामले पर गंभीरता से विचार किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सदन में दिए गए आश्वासनों का पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से पालन हो। उनका यह बयान सरकार और प्रशासन के बीच जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।