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Bihar Assembly : मंत्री श्रेयसी सिंह के विभाग में हुआ बड़ा खेल, भजापा विधायक ने ही सदन के अंदर खोली पोल; जवाब देने में छूटे पसीने

बिहार विधानसभा में आज प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक ने खेल मंत्री को महिला कबड्डी वर्ल्ड कप मामले को लेकर घेरा। विधायक ने सवाल उठाया कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था और 31 जनवरी 2025 को सुनवाई हुई थी, तब भी अधिकारियों ने इसे कैबिनेट की मंजूरी

10-Feb-2026 11:36 AM

By First Bihar

Bihar Assembly : बिहार विधानसभा में आज प्रश्नकाल के दौरान भाजपा के विधायक ने खेल मंत्री को घेरते हुए सवाल किया। उन्होंने पूछा कि मंत्री जी ने स्वयं ऑनलाइन जवाब में बताया था कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसलिए बिहार में होने वाले महिला कबड्डी वर्ल्ड कप को रद्द कर दिया गया।


लेकिन इसमें यह उल्लेख नहीं किया गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में 21 जनवरी 2025 को दाखिल हुआ, सुनवाई 31 जनवरी 2025 को हुई और अगली सुनवाई 17 फरवरी 2026 को निर्धारित है। 4 फरवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में इंटरपोल और सीबीआई को जांच का आदेश जारी किया।


विधायक ने बताया कि उनके पास कैबिनेट की रिपोर्ट है, जिसमें यह प्रतीत होता है कि कैबिनेट को गुमराह किया गया। विभाग ने इसे हल्के में लिया और कैबिनेट के एजेंडा नंबर 47 के तहत स्वीकृत करवा दिया। इसके बाद 12 अप्रैल को MOU साइन हो गया, और फिर मामले को स्थगित कर दिया गया।


विधायक ने मंत्री से पूछा कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था, तो कैबिनेट से इसे कैसे पास करवाया गया, MOU कैसे साइन हुआ और इसके बाद स्थगित किया गया। साथ ही, ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सरकार क्या कार्रवाई करेगी जिन्होंने इतनी लापरवाही दिखाई।


इसके उत्तर में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि किसी भारतीय फेडरेशन पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे ऑर्डर पास किया है और उनके वित्तीय मामलों को लेकर मामला गंभीर है। MOU साइन करने के बाद इसे कैंसल करने का निर्णय लिया गया क्योंकि सरकार किसी फेडरेशन के साथ अपना नाम नहीं जोड़ना चाहती थी। मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित था, और इस फेडरेशन पर गंभीर आरोप थे। ऐसे मामलों में किसी भी राज्य ने अनुमति नहीं दी।


इसके बाद भाजपा विधायक ने कहा कि उनका सवाल यही है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और गंभीर आरोप होने के बावजूद यह कैसे कैबिनेट से पास हो गया। मंत्री जी जवाब घुमा रहे हैं। उनका सीधा सवाल था कि 31 जनवरी 2025 को मामला रजिस्टर्ड हुआ, 4 फरवरी को आदेश आया, फिर भी कैबिनेट ने इसे पास किया और MOU साइन कर लिया, बाद में स्थगित किया गया। ऐसे अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी।


मंत्री ने जवाब दिया कि फरवरी में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया और उसी समय कैबिनेट की बैठक भी हुई। तुरंत MOU हटाना संभव नहीं था। इसके बाद भाजपा विधायक ने कहा कि जब इस मामले में स्वयं सॉलिसिटर जनरल उपलब्ध थे, तो फिर यह मामला कैबिनेट में क्यों लाया गया और उसके दो महीने बाद अप्रैल में MOU कैसे साइन कर लिया गया।